यूपी : इंडियन टी20 लीग में सट्टेबाजों के बड़े गिरोह का भंडाफोड़, देश से विदेश तक फैला है जाल
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उत्तर प्रदेश में इंडियन टी20 लीग के सट्टेबाजों के बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। जिसमें यूपी एसटीएफ की टीम ने कई जगहों पर छापेमारी कर आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। वाराणसी से सट्टेबाजी गिरोह के तीन एजेंट और कानपुर से मुख्य बुकी समेत पांच आरोपी पकड़े गए हैं।
इंडियन टी20 लीग (IPL) में सट्टेबाजी करने वाले गिरोह पर बुधवार को यूपी एसटीएफ द्वारा बड़ी कार्रवाई की गई। एसटीएफ की टीम ने वाराणसी और कानपुर में छापेमारी की। जिसमें कानपुर और वाराणसी में इंडियन टी20 लीग में हो रही सट्टेबाजी के तार आपस में जुड़े मिले। एसटीएफ ने वाराणसी से अशोक सिंह, सुनील पाल और विक्की खान को गिरफ्तार किया है।
उधर, वाराणसी में इंडियन टी20 लीग की सट्टेबाजी का प्रमुख एजेंट सुंदरपुर निवासी अजय सिंह मौके से फरार हो गया। वहीं, कानपुर से सट्टेबाजी गिरोह का सरगना जितेंद्र उर्फ जीतू सहित आशीष, सुमित, मोहित और हिमांशु गिरफ्तार हुए हैं। मुख्य बुकी जितेंद्र सट्टेबाजी का धंधा अजय सिंह को अपना एजेंट बना कर वाराणसी में चलाता था।
वाराणसी में पकड़े गए सट्टेबाजों के पास से एसटीएफ ने 27.75 लाख रुपए और कई मोबाइल फोन बरामद किए हैं। उधर, कानपुर में पकड़े गए सट्टेबाजों के पास से 2.75 लाख रुपये, 5 लैपटॉप, 3 स्मार्ट टीवी, राऊटर, वाईफाई अडॉप्टर, 30 मोबाइल फोन और 375 यूएई दिरहम (विदेशी मुद्रा) बरामद हुए हैं। वहीं, फरार अजय की फॉर्च्यूनर और जीतू की मर्सिडीज कार भी पुलिस ने जब्त कर ली है।
ऐसे चलता है सट्टेबाजी का कारोबार
पकड़े गए जितेंद्र ने बताया कि वह कानपुर में ही दो ऑनलाइन बेटिंग बॉक्स रखा था। हर बेटिंग बॉक्स से 10 बुकी माइक और स्पीकर के जरिए ऑनलाइन सट्टा लगाते है। इस बॉक्स में बुकी की बातें भी रिकॉर्ड करने की व्यवस्था है।
जितेंद्र ने बताया कि कभी-कभी सट्टा लगाने के दौरान विवाद की स्थिति में बुकी की रिकॉर्ड की गई बातों को सुनाकर मामले को सुलझाया जाता है। जितेंद्र ने लैपटॉप में ऑरेंज नामक ऑनलाइन एप डाउनलोड कर रखा था, जिससे उसे इंडियन टी20 लीग खेले जाने वाले हर खेल के भाव (रेट) की जानकारी होती थी।
इसके बाद जितेंद्र प्रदेश भर में फैले अपने एजेंट को व्हाट्सएप के माध्यम से वॉयस कॉल कर के भाव की सूचना देता था। जितेंद्र के तार प्रदेश और देश के बाहर रायपुर, अजमेर, जयपुर, मुंबई, दिल्ली और दुबई के बुकी से जुड़े है। वहीं, उत्तर प्रदेश में कानपुर, लखनऊ, फतेहपुर, वाराणसी, प्रयागराज आदि जिलों में भी जितेंद्र ने अपना जाल बिछा रखा है।
व्हाट्सएप से वॉयस कॉल कर पुलिस को करते है गुमराह
पुलिस का कहना है कि ये बुकी इतने शातिराना तरीके से सट्टेबाजी करते है कि इनकी आय और फोन का कोई रिकॉर्ड नहीं मिल पाता है। सट्टेबाजी में मिलने वाले रुपये का लेनदेन ये गुप्त तरीके से करते हैं। सट्टेबाजी के लिए व्हाट्सएप से वॉयस कॉल का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि पुलिस व्हाट्सएप कॉल को जल्दी ट्रेस नहीं कर पाती है।
बुकी जितेंद्र ने ये काम कई सालों तक दुबई में रह कर किया है। भारत वापस आने के बाद जितेंद्र ने ऑनलाइन सट्टेबाजी का धंधा शुरू कर दिया। जीतू के मुंबई, कानपुर, लखनऊ, फतेहपुर में खरीदे हुए कई मकानों का भी ब्योरा पुलिस को मिला है।