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भारत एक महाशक्ति: BHU में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले- रुस-यूक्रेन जंग में सुनी गई सिर्फ इंडिया की बात

Fri, 31 Mar 2023 06:43 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 31 Mar 2023 06:43 PM IST
सार

वाराणसी दौरे पर पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शुक्रवार को बीएचयू के अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र पहुंचे। 'शैक्षिक जगत के समक्ष उच्च शिक्षा में उभरती चुनौतियां' विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए विश्वगुरु और महाशक्ति पर अपनी बात रखी।

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India is superpower Former President Ramnath Kovind said in BHU for Russia Ukraine war
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि भारत विश्व की महाशक्ति बन चुका है। आने वाले तीन वर्षों में अपना देश विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन जाएगा। दुनिया में भारत की साख काफी बढ़ी है। रुस-यूक्रेन के बीच जारी जंग में सिर्फ भारत की बात सुनी गई। पूर्व राष्ट्रपति शुक्रवार को बीएचयू के अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी के उद्धाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।  

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'शैक्षिक जगत के समक्ष उच्च शिक्षा में उभरती चुनौतियां' विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि आज हम विश्वगुरु की बात करते हैं लेकिन मैं कहता हूं कि भारत तो विश्व की महाशक्ति बन चुका है। चाहे आप विश्व गुरु कहें या विश्व महाशक्ति कहें। पूरा विश्व भारत की इस आभा को पहचान रहा है। पूरी दुनिया को आभास है कि आने वाला समय भारत का ही है।

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इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ

रूस और यूक्रेन के बीच एक साल से ज्यादा समय से युद्ध चल रहा है। कोई एक दूसरे की बात सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है। ऐसे माहौल में दोनों देशों ने किसी की बात सुनी तो सिर्फ भारत की बात सुनी। यह बहुत बड़ी बात है। मुझे नहीं लगता कि इतिहास में ऐसा कहीं हुआ होगा। दो देश युद्ध कर रहे हों और उनसे कहा जाए कि 24 घंटे के लिए सीजफायर कर दें। हमारे देश के 23 हजार बच्चे यूक्रेन में फंसे थे। सभी सकुशल 24 घंटे के अंदर वापस आ गए। भारत सरकार ने स्पेशल फ्लाइट भेजी और सभी को अपने देश ले आया गया।

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India is superpower Former President Ramnath Kovind said in BHU for Russia Ukraine war
बीएचयू के अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद - फोटो : अमर उजाला

चार देश जो सीमा पर थे। भारत ने अपने बच्चों से कहा कि वह अपने आसपास के देशों की सीमा के पास जहां पहुंच सकते हैं पहुंचे। वहां पर हमारे एंबेसी के लोग मिलेंगे। तिरंगा केवल हमारा चिन्ह था। तिरंगा को देखकर आप आगे बढ़ते जाइए। अमेरिका और चाइना को विश्व महाशक्ति कहा जाता है। उन्होंने अपने छात्रों से कह दिया कि हम हेल्पलेस हैं। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, मैं कहता हूं कि जब अमेरिका और चीन जैसे देशों ने हाथ खड़े कर दिए, ऐसी स्थिति में अगर भारत की बात सुनी गई हो तो फिर विश्वशक्ति कहने के लिए अभी आपको और कुछ कहना पड़ेगा और कुछ जोड़ना पड़ेगा। 
ये भी पढ़ें: वाराणसी में जी-20 की छह बैठकें प्रस्तावित, एयरपोर्ट से शहर तक ऐसी चल रही है तैयारी

पूर्व राष्ट्रपति बोले- राजनीति तो चलती रहेगी..

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि जी-20 की अध्यक्षता मिली है। इसमें कौन-कौन से देश हैं सभी जानते हैं। यही लक्षण हैं विश्व महाशक्ति बनने के। विश्वगुरु और विश्वशक्ति की कल्पना इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि कोई ऐसी सरकार बनेगी जो विश्व स्तर पर मान्य होगी। कोई ऐसा राष्ट्रपति होगा जो सबसे सर्वशक्तिमान होगा। आज आप विश्व की आर्थिक शक्ति हैं। आने वाले दो तीन वर्षों में आप विश्व की तीसरी आर्थिक शक्ति बनने वाले हैं।

इंग्लैंड, फ्रांस समेत कई देशों को भारत ने पीछे छोड़ दिया है। इंडिया इज राइजिंग। राजनीति तो चलती रहेगी। हर कोई राजनीतिक शक्ति प्राप्त करना चाहता है। आज देश प्रगति पर है। प्रगति अर्थात विकास की गति में इजाफा हुआ है। शायद उसकी कल्पना हम नहीं कर पाए हैं। अगर भारत के विकास को देखना है तो विदेश जाकर इसका अनुभव किया जा सकता है। यूरोपियन देशों के लोग राष्ट्रपति को रिसीव करने नहीं आते थे अब वह भी प्रोटोकॉल के साथ एयरपोर्ट पर रिसीव करने आने लगे। 

युवाशक्ति के निर्माता हैं शिक्षक

पूर्व राष्ट्रपति ने शिक्षकों को युवाशक्ति का निर्माता बताते हुए कहा कि काबिल युवाओं को तैयार करने वाले शिक्षक ही हैं। शिक्षक को शिक्षा व्यवस्था के मूलभूत सुधारों पर फोकस करना चाहिए। सीखने-सिखाने के साथ वर्तमान में जीना होगा। चिंतन मनन करना ही शिक्षक का काम है। सीखने के लिए हर इंसान को अहंकार से दूर होना होगा। काम करने के लिए तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा और उसके प्रयोग को तेजी से आत्मसात करने की बात कही।

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