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Independence Day: बनारस की तिरंगा बर्फी ने उड़ा दी थी फिरंगियों की नींद, अंग्रेजों के खिलाफ फूंका था बिगुल

Tue, 15 Aug 2023 06:13 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Tue, 15 Aug 2023 06:13 AM IST
सार

Independence Day 2023: देश की आजादी की लड़ाई के दौरान जब अंग्रेजी हुकूमत ने तिरंगा लहराने पर रोक लगा दी तो तिरंगा बर्फी के जरिए लोगों में देशभक्ति की भावना जगाई जाती थी। तिरंगे पर रोक के दौर में लोग तिरंगी बर्फी हाथों में लिए घूमते थे। 

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Independence Day 2023 Tiranga Barfi of varanasi gave sleepless nights to British
तिरंगा बर्फी - फोटो : facebook

विस्तार

आजादी की लड़ाई में बनारस का भी विशेष योगदान रहा है। स्वतंत्रता सेनानियों के साथ-साथ यहां के मिठाई कारोबारियों ने भी अपने तरीके से भरपूर साथ दिया था। देश की आजादी की लड़ाई के दौरान जब अंग्रेजी हुकूमत ने तिरंगा लहराने पर रोक लगा दी तो तिरंगा बर्फी के जरिए लोगों में देशभक्ति की भावना जगाई जाती थी। तिरंगे पर रोक के दौर में लोग तिरंगी बर्फी हाथों में लिए घूमते थे। इसके बाद बनारस से ही जवाहर लड्डू, गांधी गौरव, मदन मोहन, वल्लभ संदेश, नेहरू बर्फी के रूप में राष्ट्रीय मिठाइयां सामने आईं।

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तिरंगी बर्फी और तिरंगे जवाहर लड्डू में आज की तरह रंग का उपयोग नहीं हुआ था। हरे रंग के लिए पिस्ता, सफेद के लिए बादाम और केसरिया के लिए केसर का प्रयोग कर तिरंगे का रूप दिया गया था। तिरंगा बर्फी को 1940 में श्रीराम भंडार के संचालक रघुनाथ दास ने ईजाद किया था। इसकी लोकप्रियता देख  फिरंगियों की नींद उड़ गई।

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रंग के लिए केसर और पिस्ता का इस्तेमाल

आज भी तिरंगी बर्फी का प्रचलन आमजन के बीच कम नहीं है। तिरंगा बर्फी में रंग के लिए केसर और पिस्ता का इस्तेमाल किया जाता है। पुराने लोगों के अनुसार तिरंगा बर्फी को देखने के बाद अंग्रेजों के होश उड़ गए थे। बाबा बंगाली स्वीट्स महमूरगंज के संचालक राजन यादव ने बताया कि 15 अगस्त और 26 जनवरी को सबसे अधिक तिरंगा बर्फी बिकती है। स्कूलों  के अलावा बाहर से भी ऑर्डर आते हैं। 

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कैसे बनती है तिरंगा बर्फी

तिरंगा बर्फी तीन परत में बनती है। तिरंगे की तरह केसरिया, सफेद व हरे रंग की होती है। स्वादिष्ट के साथ ही यह एकजुटता का भी संदेश देती है। पहले तिरंगा बर्फी सिर्फ काजू, पिस्ता और बीच में बादाम के परत से तैयार की जाती थी। हालांकि अब इसमें खोवा का भी मिश्रण हो रहा है। 

बनारसी पान पर अंग्रेजों ने लगा दिया था प्रतिबंध

Independence Day 2023 Tiranga Barfi of varanasi gave sleepless nights to British
बनारसी पान - फोटो : अमर उजाला

बनारसी पान और मिठाई ने भी आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। देश को आजाद कराने के लिए बनारस में युवा-बुजुर्ग सड़क पर लड़ रहे थे तो यहां की मिठाई, पान और तवायफें उनका हौसला बढ़ा रही थीं। उस दौर में पहली बार बनारस में ही तिरंगा बर्फी बनी। वहीं दुनिया भर में मशहूर बनारसी पान पर भी अंग्रेजों ने प्रतिबंध लगा दिया था। अंग्रेजों को शक था कि स्वतंत्रता आंदोलन में पान की भी कोई भूमिका है इसलिए पान बेचने से लेकर खाने तक पर पाबंदी लगा दी गई थी। बावजूद इसके चोरी-चोरी घर-घर पान पहुंचता था। 

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