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विज्ञान के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे भारतीय छात्र
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
Updated Sun, 09 Aug 2015 02:15 AM IST
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जापान सोसाइटी फार प्रमोशन ऑफ साइंस के एक्जक्यूटिव डायरेक्टर एवं टोक्यो यूनिवर्सिटी के इमरिटस प्र्रो. मकोटो असाशिमा ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में भारतीय छात्र् तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उनमें नया करने और जानने की काफी उत्सुकता है। यह बीएचयू और भारत के लिए विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने में काफी सहायक होगा। वे शनिवार को इंडियन जापानीज एलुमनी एसोसिएशन (आईजेएए) और जापान सोसाइटी ऑफ प्रोमोशन ऑफ साइंस (जेएसपीएस) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन पत्रकारों को बात कर रहे थे।
उन्होंने जूॅलॉजी विभाग में एक अतिथि व्याख्यान भी दिया। इस दौरान विभाग के विद्यार्थियों की ओर से प्रूछे गए सवाल, उनमें सीखने की इच्छाशक्ति और नया जानने की आकुलता से वह काफी प्रभावित थे। उन्होंने कक्षाओं के साथ लैब का भी भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि बीएचयू की ओर से विद्यार्थियों को अच्छे और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इससे शिक्षा के साथ शोध में भी गुणवत्ता आएगी। उन्होंने
कहा कि यहां के छात्रों में संभावनाओं को तलाशने की ललक है। छात्र-छात्राओं में कार्य करने की भरपूर ऊर्जा है। उन्होंने कहा कि भारत में तेजी से सभी क्षेत्रों में विकास हो रहा है लेकिन सामाजिक और चिकित्सा केक्षेत्र में और बेहतर कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि विज्ञान और तकनीक के अलावा अन्य दूसरे क्षेत्राें में शोध के लिए हर साल तीन सौ भारतीय छात्र जापान जाते हैं और करीब 150 छात्र-छात्राएं भारत आते हैं। इससे दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध को प्रगाढ़ होते ही है। साथ ही नए शोध को बढ़ावा मिलता है।
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उन्होंने जूॅलॉजी विभाग में एक अतिथि व्याख्यान भी दिया। इस दौरान विभाग के विद्यार्थियों की ओर से प्रूछे गए सवाल, उनमें सीखने की इच्छाशक्ति और नया जानने की आकुलता से वह काफी प्रभावित थे। उन्होंने कक्षाओं के साथ लैब का भी भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि बीएचयू की ओर से विद्यार्थियों को अच्छे और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इससे शिक्षा के साथ शोध में भी गुणवत्ता आएगी। उन्होंने
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कहा कि यहां के छात्रों में संभावनाओं को तलाशने की ललक है। छात्र-छात्राओं में कार्य करने की भरपूर ऊर्जा है। उन्होंने कहा कि भारत में तेजी से सभी क्षेत्रों में विकास हो रहा है लेकिन सामाजिक और चिकित्सा केक्षेत्र में और बेहतर कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि विज्ञान और तकनीक के अलावा अन्य दूसरे क्षेत्राें में शोध के लिए हर साल तीन सौ भारतीय छात्र जापान जाते हैं और करीब 150 छात्र-छात्राएं भारत आते हैं। इससे दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध को प्रगाढ़ होते ही है। साथ ही नए शोध को बढ़ावा मिलता है।
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