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लापरवाहीः कला और संस्कृति की नगरी में काशी में संस्कृति विभाग पर लटक रहा ताला, चार वर्षों से ना तो स्थायी अधिकारी और ना ही किसी कर्मचारी की नियुक्ति

Mon, 14 Jun 2021 10:54 AM IST
उत्पल कांत आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 14 Jun 2021 10:54 AM IST
सार

कला और संस्कृति की नगरी काशी में संस्कृति विभाग के कार्यालय पर ही चार सालों से ताला लटक रहा है। पीएम के संसदीय क्षेत्र होने के बाद भी चार सालों से विभाग में ना तो स्थायी अधिकारी और ना ही किसी कर्मचारी को नियुक्त किया गया है।

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in the city of art and culture lock hanging on the culture department in Kashi neither a permanent officer nor an employee has been appointed for four years.
काशी में संस्कृति विभाग पर लटक रहा ताला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कला और संस्कृति की नगरी काशी में संस्कृति विभाग के कार्यालय पर ही चार सालों से ताला लटक रहा है। पीएम के संसदीय क्षेत्र और संस्कृति मंत्री का क्षेत्र होने के बाद भी चार सालों से विभाग में ना तो स्थायी अधिकारी और ना ही किसी कर्मचारी को नियुक्त किया गया है।  बनारस में संस्कृति विभाग बिना कर्मचारियों के उधार के अधिकारी के भरोसे ही चल रहा है। कार्यालय बंद होने के कारण कलाकारों को ना तो सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी मिल पाती है और ना ही समय से कोई भी मदद।

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विश्व की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले बनारस के संस्कृति विभाग में पिछले चार सालों से एक चपरासी तक नहीं जो कार्यालय का ताला खोल सके। काशी के कलाकारों का कहना है कि सिगरा में बने कार्यालय की २० सीढिय़ां चढ़े हुए उनको तो चार साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। 2019 में क्षेत्रीय सांस्कृतिक अधिकारी डॉ. रत्नेश वर्मा सेवानिवृत्त हो गए।
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इसके लंबे समय बाद संस्कृति विभाग के क्षेत्रीय संस्कृति अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार राज्य ललित कला अकादमी के सचिव डॉ. यशवंत सिंह राठौर को सौंपा गया। ललित कला अकादमी के सचिव पद की जिम्मेदारी होने के कारण वह महीने में एक या दो बार अथवा विशेष आयोजन होने पर ही वाराणसी आ पाते हैं। कार्यालय में चपरासी तथा कर्मचारी नहीं होने के कारण कार्यालय का ताला भी नहीं खुलता है। 
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सचिव राज्य ललित कला अकादमी एवं क्षेत्रीय सांस्कृतिक अधिकारी डॉ. यशवंत सिंह राठौर ने कहा कि विभाग में कर्मचारियों के नहीं होने के कारण कार्यालय नहीं खुल पा रहा है। कर्मचारियों की कमी के बारे में शासन को पत्र भेजा गया है। 


 

पूरे प्रदेश में नहीं हैं जिला सांस्कृतिक अधिकारी

भूतपूर्व क्षेत्रीय सांस्कृतिक अधिकारी डॉ. रत्नेश वर्मा ने कहा कि  2019 में जब मैं सेवानिवृत्त हुआ था तो इस दौरान भी हम लोग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे थे। हमने तो किसी तरह अपना कार्यकाल पूर्ण कर लिया। केवल वाराणसी ही नहीं पूरे प्रदेश में जिला सांस्कृतिक अधिकारी तैनात नहीं हैं। जिला स्तर का कोई भी अधिकारी संस्कृति विभाग में नहीं है। इस समय अधिकांश लोग सेवानिवृत्त हो चुके हैं। संस्कृति विभाग का कार्यालय नहीं खुलने से सांस्कृतिक गतिविधियां बंद हैं। विभाग नहीं खुलने से स्थानीय स्तर पर भी योजनाएं नहीं बनेंगी।

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हर बार लटका मिला है ताला
चार साल में हम कई बार संस्कृति विभाग के दफ्तर गए लेकिन हर बार ताला लटका मिला। कलाकारों को विभाग की ओर से किसी भी विकास कार्यक्रम, पेंशन संबंधित किसी भी योजना की जानकारी समय से नहीं मिल पा रही है। अधिकारियों से जब बात की तो पता चला कि विभाग में कोई कर्मचारी ही तैनात नहीं है। जिस अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है वह भी कभी-कभी वाराणसी आते हैं। 
विष्णु यादव, बिरहा गायक, यश भारती सम्मानित

गतिविधियों से होता है जुड़ाव
संस्कृति विभाग की कार्यालय नहीं खुलने के कारण स्थानीय स्तर पर कला-संस्कृति की गतिविधियां ठप सी हो गई हैं। पहले समय-समय पर आयोजन होते तो कलाकारों को आमदनी भी हो जाती थी। एक तो दो साल से कोरोना संक्रमण और दूसरे विभाग की तालाबंदी। ऐसे में हम कलाकार जाएं तो जाएं कहां। 
जवाहर लाल यादव, साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित बिना गमछा

किससे कहें अपनी व्यथा
कला और संस्कृति की नगरी बनारस में संस्कृति विभाग पर चार सालों से ताला ही लटक रहा है। बनारस और बनारस के कलाकारों के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। कलाकारों के हित के लिए विभाग की स्थापना की गई थी लेकिन वह भी दुर्भाग्य से बंद है। ऐसी स्थिति में कलाकार अपनी व्यथा किससे कहें। 
मन्ना लाल यादव, लोकगायक, साहित्य अकादमी 

समय बीतने के बाद मिलती है जानकारी
हम तो कई बार सिगरा स्थित संस्कृति विभाग के कार्यालय गए लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। कलाकारों के लिए होने वाले आयोजन और योजनाओं की जानकारी समय बीतने के बाद ही मिलती है। कार्यालय खुलने से जिले भर के कार्यालयों को रोजगार के साथ ही समय से योजनाओं की जानकारी हो जाएगी।
अनिता राज, बिरहा गायिका
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