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महाश्मशान नाथ के कार्यक्रम स्थल पर अवैध कब्जा
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चैत्र नवरात्र में वर्षों से चले आ रहे बाबा महाश्मशान मंदिर में वार्षिक शृंगार के कार्यक्रम स्थल पर लकड़ी व्यापारियों द्वारा अवैध रूप से लकड़ी रख कब्जा करने को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है। आरोप है कि प्रशासन सबकुछ जानते हुए भी समाधान नहीं कर रहा है। ऐसे में आंदोलन की चेतावनी दी है।
बाबा श्मशान नाथ सेवा समिति के उपाध्यक्ष दिलीप यादव ने बताया कि काशी में चैत्र नवरात्र पर सप्तमी के दिन महाश्मशान घाट पर अनूठी महफिल सजती है। जलती चिताओं के बीच नगर वधुओं के पांव में घुंघरू रातभर इस महफिल में बजते रहते हैं। कार्यक्रम स्थल पर जहां मंच लगते हैं वहीं अवैध रूप से लकड़ी रखकर कब्जा जमा लिया गया है। इसके कारण सैकड़ों वर्षों से चली आ परंपरा टूटने की कगार पर है। महाश्मशान नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष चेनु प्रसाद गुप्ता बताते हैं कि राजा मानसिंह द्वारा स्थापित बाबा मसाननाथ मंदिर में कार्यक्रम पेश करने के लिए उस समय की जानी-मानी नर्तकियों और कलाकारों को बुलाया गया था। चूंकि मंदिर श्मशान के बीचों बीच था, लिहाजा ख्यातिलब्ध कलाकारों ने इनकार कर दिया। राजा ने कार्यक्रम का ऐलान करवा दिया था। अब समस्या यह कि कार्यक्रम कैसे हो। इसके बाद नगर वधुओं को आमंत्रित किया गया। नगर वधुओं ने राजा मानसिंह का निमंत्रण स्वीकार किया और तब से यह परंपरा चली आ रही है। लेकिन यदि इस बार कार्यक्रम स्थल से अवैध कब्जा नहीं हटाया गया तो सैकड़ों साल से चली आ रही परंपरा इस बार टूट सकती है।
छह अप्रैल से शुरू होगा महोत्सव
चेनु प्रसाद ने बताया कि बाबा श्मशान नाथ का तीन दिवसीय शृंगार महोत्सव इस बार छह अप्रैल से शुरू होगा। इसमें पहले दिन बाबा का रुद्राभिषेक पूजन हवन का कार्यक्रम है। दूसरे दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। आठ अप्रैल परंपरा को निभाते हुए नगर वधुएं बाबा के दरबार में अपनी हाजिरी लगाएंगी।
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बाबा श्मशान नाथ सेवा समिति के उपाध्यक्ष दिलीप यादव ने बताया कि काशी में चैत्र नवरात्र पर सप्तमी के दिन महाश्मशान घाट पर अनूठी महफिल सजती है। जलती चिताओं के बीच नगर वधुओं के पांव में घुंघरू रातभर इस महफिल में बजते रहते हैं। कार्यक्रम स्थल पर जहां मंच लगते हैं वहीं अवैध रूप से लकड़ी रखकर कब्जा जमा लिया गया है। इसके कारण सैकड़ों वर्षों से चली आ परंपरा टूटने की कगार पर है। महाश्मशान नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष चेनु प्रसाद गुप्ता बताते हैं कि राजा मानसिंह द्वारा स्थापित बाबा मसाननाथ मंदिर में कार्यक्रम पेश करने के लिए उस समय की जानी-मानी नर्तकियों और कलाकारों को बुलाया गया था। चूंकि मंदिर श्मशान के बीचों बीच था, लिहाजा ख्यातिलब्ध कलाकारों ने इनकार कर दिया। राजा ने कार्यक्रम का ऐलान करवा दिया था। अब समस्या यह कि कार्यक्रम कैसे हो। इसके बाद नगर वधुओं को आमंत्रित किया गया। नगर वधुओं ने राजा मानसिंह का निमंत्रण स्वीकार किया और तब से यह परंपरा चली आ रही है। लेकिन यदि इस बार कार्यक्रम स्थल से अवैध कब्जा नहीं हटाया गया तो सैकड़ों साल से चली आ रही परंपरा इस बार टूट सकती है।
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छह अप्रैल से शुरू होगा महोत्सव
चेनु प्रसाद ने बताया कि बाबा श्मशान नाथ का तीन दिवसीय शृंगार महोत्सव इस बार छह अप्रैल से शुरू होगा। इसमें पहले दिन बाबा का रुद्राभिषेक पूजन हवन का कार्यक्रम है। दूसरे दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। आठ अप्रैल परंपरा को निभाते हुए नगर वधुएं बाबा के दरबार में अपनी हाजिरी लगाएंगी।
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