छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म मामला: बचाव पक्ष ने साक्ष्य पेश करने के लिए समय मांगा, आरोपों को मनगढ़ंत बताया
आईआईटी बीएचयू छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म मामले में शनिवार को फास्टट्रैक कोर्ट में सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने पीड़िता के आरोपों को मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि आरोपियों ने घटना के दिन छात्रा और उसके साथी को आपत्तिजनक स्थिति में देखा था। अधिवक्ताओं ने साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए अदालत से समय मांगा।
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आईआईटी बीएचयू की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में फास्टट्रैक कोर्ट (प्रथम) के न्यायाधीश कुलदीप सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आरोपित कुणाल पांडेय और सक्षम पटेल के अधिवक्ताओं ने पीड़िता के आरोपों को मनगढ़ंत बताया। बचाव पक्ष ने अदालत से साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा।
बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि दो नवंबर 2023 की रात आरोपी चेतगंज की नक्कटैया देखकर बीएचयू होते हुए अपने घर जा रहे थे। इसी दौरान देर रात उन्होंने बीएचयू परिसर में पीड़िता और उसके हमउम्र युवक को कथित रूप से आपत्तिजनक स्थिति में देखा। अधिवक्ताओं के मुताबिक, बाइक की रोशनी में दोनों को देखने के बाद आरोपियों ने उन्हें डांटकर वहां से हटने के लिए कहा।
बचाव पक्ष का कहना था कि इसी बात को लेकर पीड़िता और उसके साथी से आरोपियों की कहासुनी हो गई। इसके बाद आरोपियों ने बीएचयू के पास मौजूद सुरक्षाकर्मियों को बुलाया। अधिवक्ताओं ने अदालत में दावा किया कि बाद में पीड़िता और उसके साथी ने आरोपियों को फंसाने के लिए झूठी कहानी गढ़कर प्राथमिकी दर्ज कराई।
इससे पहले 29 अगस्त को हुई सुनवाई में भी आरोपियों ने घटना वाले दिन बीएचयू परिसर में मौजूद होने की बात स्वीकार की थी, लेकिन छात्रा और उसके साथी की ओर से लगाए गए आरोपों से इन्कार किया था। बचाव पक्ष ने तब भी अदालत के समक्ष कहा था कि अभियोजन के पास आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं है।
शनिवार की सुनवाई में बचाव पक्ष ने अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा। अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपित कुणाल पांडेय, आनंद चौहान और सक्षम पटेल मौजूद रहे। मामले में अदालत के समक्ष दोनों पक्षों की ओर से अपनी-अपनी दलीलें रखी जा रही हैं।