IIT BHU: माइक्रोवेव तकनीक से इको फ्रेंडली स्ट्रॉ बनाने पर पेटेंट, उत्पादन भी संभव; जानें खास
इको फ्रेंडली और किफायती स्ट्रॉ बनाकर आईआईटी-बीएचयू के वैज्ञानिकों ने नयापन हासिल किया है। धान, गेहूं, सरसों के डंठल और पपीते के वेस्ट से भी स्ट्राॅ बनाया गया था। इस काफी चर्चित हो रहा है।
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IIT BHU: आईआईटी बीएचयू के वैज्ञानिकों ने माइक्रोवेव तकनीक से वेस्ट बायोमास लेकर इको फ्रेंडली और किफायती स्ट्रॉ बनाने में कामयाबी पाई है। ये प्लास्टिक और कागज के स्ट्रॉ से ज्यादा टिकाऊ हो सकता है।
प्लास्टिक से होने वाले शारीरिक नुकसानों को भी रोकेगा। इन स्ट्रॉ को कम लागत में तैयार किया गया है, जिससे इनका उत्पादन व्यावसायिक रूप से भी संभव है। आई साइंस नाम से सेल और फूड केमेस्ट्री नाम से एल्सेवियर जर्नल में ये रिसर्च प्रकाशित हो चुका है। पेटेंट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी कर दी गई है। इससे पहले धान, गेहूं, सरसों के डंठल और पपीते के वेस्ट से भी स्ट्रॉ बनाया गया है।
बायो केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रद्युत धर और शोध छात्र रोहित राय ने बांस के वेस्ट और जिलेटिन से स्ट्रॉ तैयार किया है। निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि डॉ. प्रद्युत धर और टीम को बधाई। ये ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में बड़ा कदम है।
उत्पादन भी संभव
स्ट्रॉ को कम लागत में तैयार किया गया है। व्यावसायिक रूप से इसका उत्पादन भी संभव है। इस इनोवेशन के लिए भारत सरकार ने पेटेंट दिया है। इसका नंबर : 557472 और शीर्षक है- बायोडिग्रेडेबल बांस आधारित पेय स्ट्रॉ और इसे तैयार करने की विधि। वैज्ञानिकों की ओर से तकनीक ट्रांसफर कर दी गई है।
व्यापार युद्ध में कोई विजेता नहीं होता
बीएचयू में वित्त और कॉर्पोरेट प्रकोष्ठ की ओर से ओरिएंटेशन कार्यक्रम में मंगलवार को वाणिज्य संकाय के एनेक्स 'ए' सभागार में 70 छात्र-छात्राओं ने हिस्सेदारी की। प्रो. डी साहू ने अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ युद्धों के भू-राजनीतिक प्रभावों पर बताया कि ऐसे संघर्ष वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करते हैं। लंबे समय तक चलने वाले व्यापार युद्ध में कोई विजेता नहीं होता।