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कहीं आंसुओं का नजराना तो कहीं खूनी मातम
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 25 Oct 2015 01:47 AM IST
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जिधर देखो उधर बस इमाम हुसैन का जिक्र। फिजा में सिर्फ नामे हुसैन की सदाएं गूंज रही थीं। मोहर्रम की दसवीं तारीख यानी शनिवार को शहर भर में जब ताजियों के जुलूस का सिलसिला शुरू हुआ तो यूं लगा सारा आलम नबी के नवासे इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत पेश करने को उमड़ पड़ा हो।
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माहौल गमजदा जरूर था मगर दिल में अकीदत का जज्बा पूरा था। फातमान और सरैया की ओर ताजियों संग बढ़ता हजारों लोगों का काफिला इमाम हुसैन की कुर्बानी की पूरी दास्तां बयां कर रहा था।
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शनिवार को शहर के अलग-अलग इलाकों से ताजियों का जुलूस सुबह से निकलना शुरू हो गया था। एक के पीछे एक ताजियों का जुलूस और आगे आगे नौजवान फन-ए-सिपाहगिरी में लाठी, तलवार वगैरह से हैरतअंगेज करतब दिखाते हुए चल रहे थे। शिवाला, मदनपुरा, रेवड़ीतालाब, बजरडीहा, मंडुवाडीह आदि के कुम्हार का ताजिया, नगीने का ताजिया, बुर्राक का ताजिया, बड़ा ताजिया, लकड़ी, शीशे का ताजिया दरगाह-ए-फातमान पर लाकर ठंडे किए गए।
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वहीं दालमंडी, नई सड़क, बेनियाबाग, लल्लापुरा, आदि इलाकों का ताजिया जैसे चपरखट का ताजिया, पीतल, फूल, कागज का ताजिया, रांगे के ताजिये सहित तमाम ताजिये फातमान लाए गए।
इस दौरान फातमान में तो मेले जैसी रौनक थी। ताजियों की जियारत के लिए, उसे छूकर मन्नत मांगने के लिए ख्वातीन ही नहीं बच्चे और बड़े भी जुलूस में शामिल रहे। इसी तरह बड़ी बाजार, दोषीपुरा, काजी सादुल्लापुरा, लड्ढनपुरा, जैतपुरा, बाकराबाद का मशहूर मोटे शाहबान, नगीने वाला ताजिया, जाली वाला ताजिया, कपूरी ताजिया आदि लाट सरैया इमामबाड़ा जाकर ठंडे किए गए।
मोहर्रम के मौके पर शहर भर से लगभग पांच सौ भी अधिक ताजियों का जुलूस निकला। अकेले लोहता से पचास से अधिक ताजियों का जुलूस निकला जिसमें चांदी की ताजिया खास रही। कई जगहों के जुलूस में ताजियों को हिंदू भाइयों ने पूरी अकीदत से कंधा दिया।