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Varanasi News: मैं गंगा विपथगामिनी हूं, अब मौन नहीं रह सकती हूं...

Wed, 01 Jul 2026 02:32 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2026 02:32 AM IST
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I am the Ganga, who has strayed from her path; I can remain silent no longer...
सुबह-ए-बनारस आनंद कानन के साहित्यिक प्रकल्प काव्यार्चन की 67वीं कड़ी मंगलवार को अस्सी घाट पर हुई। धर्म-अध्यात्म, पवित्र प्रेम और गंगा की पीड़ा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर काव्यपाठ किया गया। महेंद्र तिवारी की अध्यक्षता में काव्यपाठ की शुरुआत अनु मिश्रा ने ‘गंगा विपथगामिनी’ से हुई। उन्होंने मां गंगा की पीड़ा को व्यक्त करते हुए सुनाया, मैं गंगा विपथगामिनी हूं, अब मौन नहीं रह सकती हूं, इस संस्कृति के शव पर बैठी, यों पीर नहीं सह सकती हूं...। अनु मिश्रा ने पुरुषों की विडंबनाओं पर भी रचना सुनाई। ऋतु दीक्षित ने धर्म निष्ठा और पवित्र प्रेम पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। रत्नेश वर्मा के संयोजन में प्रताप शंकर दूबे ने सुनाया, इनका लिबास छोड़िए, मुस्कान देखिए, मुश्किल में हंस रहा है, ये इंसान देखिए...। समापन पर सभी रचनाकारों को संस्था ने प्रमाणपत्र दिया। स्वागत नागेश शांडिल्य और धन्यवाद ज्ञापन रुद्रनाथ त्रिपाठी ने किया। इस मौके पर जयप्रकाश मिश्र, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, सूर्यकांत त्रिपाठी आदि रहे।
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