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लंगड़ा आम के मातृ पेड़ से तैयार होंगे सैकड़ों कलमी पौधे
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देश-विदेश में मशहूर बनारसी लंगड़ा आम के कचहरी स्थित स्टेट बैंक परिसर में मौजूद मातृ पेड़ (मदर ट्री) से अब सैकड़ों पौधे तैयार किए जाएंगे। वन विभाग की योजना के तहत इसका खाका तैयार हो चुका है और अगले दो सप्ताह में शुरुआत हो जाएगी। उद्यान विभाग के जानकारों की मदद से कलम तैयार की जाएगी।
प्रभागीय वनाधिकारी महावीर कौजालगी ने बताया कि वन विभाग की नर्सरियों में पहले चरण में 500 पौधे तैयार किए जाएंगे। दो साल की निगरानी के बाद पौधाें को सुरक्षित स्थान पर लगाया जाएगा। जिससे जिले में बनारसी लंगडे़ आम का उत्पादन भी बढ़ेगा। 110 साल के बनारसी लंगड़ा आम के मातृ पेड़ को विरासत में शामिल करने साथ उसके वंशज को अनुवांशकीय विधि से बढ़ाने की तैयारी है। पहले चरण में हार्टिकल्चर के विशेषज्ञों के सहयोग से 500 पौध तैयार होंगे।
काशी नरेश भी रहे साक्षी
स्वाद के लिए मशहूर बनारसी लंगड़ा आम का मातृ पेड़ आज जहां मौजूद है वहां एक जमाने में बगीचा हुआ करता था। जिसकी रोचक कहानी काशी नरेश परिवार से जुड़ी है। राजा को पता चला कि कचहरी के पास लंगड़ा आम का बगीचा है जिसकी रखवाली एक साधु करते हैं। राजा वहां पहुंचे और साधु से आम की कलम देने का आग्रह किया। साधु ने पहले उन्हें कलम देने से मना कर दिया था। बाद में साधु खुद राजमहल गए और काशी नरेश को आम की कलम भेंट की। अब कचहरी में आम का बगीचा तो नहीं इसकी जगह अब एसबीआई की इमारत और आवास हैं। फिलहाल यहां लंगड़े आम का मातृ पेड़ सुरक्षित है। जिसके साथ दो और आम के पेड़ और कुछ आशोक के पेड़ हैं। विरासत में शामिल होने के बाद वन विभाग की ओर से जल्द बोर्ड लगाया जाएगा।
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प्रभागीय वनाधिकारी महावीर कौजालगी ने बताया कि वन विभाग की नर्सरियों में पहले चरण में 500 पौधे तैयार किए जाएंगे। दो साल की निगरानी के बाद पौधाें को सुरक्षित स्थान पर लगाया जाएगा। जिससे जिले में बनारसी लंगडे़ आम का उत्पादन भी बढ़ेगा। 110 साल के बनारसी लंगड़ा आम के मातृ पेड़ को विरासत में शामिल करने साथ उसके वंशज को अनुवांशकीय विधि से बढ़ाने की तैयारी है। पहले चरण में हार्टिकल्चर के विशेषज्ञों के सहयोग से 500 पौध तैयार होंगे।
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काशी नरेश भी रहे साक्षी
स्वाद के लिए मशहूर बनारसी लंगड़ा आम का मातृ पेड़ आज जहां मौजूद है वहां एक जमाने में बगीचा हुआ करता था। जिसकी रोचक कहानी काशी नरेश परिवार से जुड़ी है। राजा को पता चला कि कचहरी के पास लंगड़ा आम का बगीचा है जिसकी रखवाली एक साधु करते हैं। राजा वहां पहुंचे और साधु से आम की कलम देने का आग्रह किया। साधु ने पहले उन्हें कलम देने से मना कर दिया था। बाद में साधु खुद राजमहल गए और काशी नरेश को आम की कलम भेंट की। अब कचहरी में आम का बगीचा तो नहीं इसकी जगह अब एसबीआई की इमारत और आवास हैं। फिलहाल यहां लंगड़े आम का मातृ पेड़ सुरक्षित है। जिसके साथ दो और आम के पेड़ और कुछ आशोक के पेड़ हैं। विरासत में शामिल होने के बाद वन विभाग की ओर से जल्द बोर्ड लगाया जाएगा।
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