#हिंदीहैंहम: बदलते माध्यमों के बीच हिंदी के दम पर बढ़ते कदम, युवाओं के कामयाबी की बन रही सीढ़ी
हर भाषा की अपनी खूबी होती है, फिर अपनी मातृभाषा हिंदी का तो क्या कहना। अंग्रेजी के बढ़ते दबदबे के बीच हिंदी को लेकर पसरी चिंता कई सवाल जरूर खड़े करती है, लेकिन हिंदी गुरूर के साथ खड़ी है। यह युवाओं का भविष्य संवार रही है तो उनके चिंतन को आकार भी दे रही है।
युवाओं के कामयाबी की सीढ़ी बन रही है। बदलते माध्यमों में भी यह उतनी ही प्रभावी है। शिक्षक बनना हो या अभिनेता हर वर्ग में हिंदी वालों की लंबी लाइन है।
हिंदी के दम पर बना कलाकार
युवा रंगकर्मी व बॉलीवुड अभिनेता उमेश भाटिया एक लेखक भी हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत विविध भारती पर अनाउंसर के तौर पर की थी। जिसमें हिंदी उच्चारण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उमेश के अनुसार हिंदी हृदय की भाषा है, जिसकी वजह से हमारे शब्द हृदय से निकलते हैं और हृदय तक पहुंचते हैं।
आज वह जिस मुकाम पर हैं वो हिंदी ने ही उन्हें दिलाया है। उमेश द्वारा लिखी कविताओं जैसे गजब की मेरी काशी एवं कोमल पाषाण व हिंदी में रचित कहानी पानी कम पर लघु फिल्म भी बन चुकी है।
पाया राज्य अध्यापक का पुरस्कार
प्राथमिक विद्यालय भिटारी में प्रधानाध्यापक व राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित रविन्द्र कुमार सिंह कहते हैं कि पहले के समय में अंग्रेजी का ज्यादा चलन नहीं हुआ करता था। तब यही भाषा भारतवासियों व भारत से बाहर रह रहे हर वर्ग के लिए सम्माननीय होती थी। आज अंग्रेजी ने देश में अपने पांव गड़ा लिए है, लेकिन हिंदी ने अब धीरे-धीरे हर क्षेत्र में अंग्रेजी को कड़ी टक्कर देना शुरू कर दिया है। हिंदी अनुवाद की नहीं बल्कि संवाद की भाषा है। किसी भी भाषा की तरह हिंदी भी मौलिक सोच की भाषा है।
बच्चों को बताना होगा हिंदी का महत्व
आर्य महिला पीजी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ झुमुरसेन गुप्ता कहती हैं कि आज हर माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए अच्छे स्कूल में प्रवेश दिलाते हैं। इन स्कूलों में विदेशी भाषाओं पर तो बहुत ध्यान दिया जाता है। लेकिन हिंदी की तरफ कोई खास ध्यान नहीं दिया जाता।
लोगों को लगता है कि रोजगार के लिए इसमें कोई ऐसा खास मौका नहीं मिलेगा। लेकिन हमें इस सोच को बदलने की जरूरत है और अपने बच्चों को हिंदी का सम्मान करना सीखना होगा, तभी हम हिंदी को और सम्मान दिला पाएंगे।
भारत की पहचान है हिंदी
बीएचयू में एसिस्टेंट प्रोफेसर डॉ राजकुमार शर्मा कहते हैं एक भाषा के रूप में हिंदी न सिर्फ भारत की पहचान है। बल्कि हमारे जीवन मूल्यों संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक भी है। हिंदी सरल, सहज और सुगम भाषा होने के साथ हिंदी विश्व की संभवत: सबसे वैज्ञानिक भाषा है।
देश की स्वतंत्रता से लेकर हिंदी में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त की है। हिंदी के माध्यम से हम बेहतर जन सुविधाएं लोगों तक पहुंचा सकते हैं। भारतीय विचार और संस्कृति का वाहक होने का श्रेय हिंदी को ही जाता है।