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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Hindi Hain Hum: aprajita women who get success after face of too much struggel and challenge in varanasi

#HindiHainHum: संघर्षों को बनाया गहना, कामयाबी चूम रही कदम

Sun, 16 Aug 2020 02:56 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 16 Aug 2020 02:56 PM IST
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महिलाएं हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहती हैं, वाराणसी की कुछ महिलाएं मानती हैं कि संघर्ष व चुनौतियां एक तरह से महिलाओं का गहना होता है। अपराजिता काल में अपनी संघर्षों को बयां कर रही हैं।

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बेजुबानों ले करती हैं प्यार:
इंसानों के साथ ही बैजुबानों से बहुत ही कम लोग प्यार करते हैं। शिवपुर की रहने वाली शिक्षिका मल्लिका बनर्जी काम के साथ सड़कों पर छुट्टा पशुओं व जानवरों की देखभाल करती हैं। कहती हैं कि इंसानों को तो साथ मिल जाता है। लेकिन बेजुबानों को का कोई सहारा नहीं होता है। मल्लिका कहती हैं कि जब सड़क पर किसी जख्मी जानवर को देखती हूं तो काफी दुख होता है। एक बार घर के सामने एक गाय जख्मी थी, कोई पास नहीं जा रहा था, तो मैने उसे दवा और सप्ताह भर उपचार किया। जब गाय के जख्म ठीक हो गए तो बहुत खुशी हुई। इसके बाद जहां भी जख्मी जानवरों को देखती हूं, तो खुद सेवा में जुट जाती हूं। परिवार में इस कार्य के लिए सहयोग मिलता है।
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चुनौतियां-
जख्मी जानवरों के पास दवा के लिए जाते समय कतरा रहता है, कि कहीं खुद जख्मी न हो जाएं।
जानवरों को इलाज के दौरान रखने की जगह की कमी।
कोई अन्य भी मदद नहीं करता।

विशेष खानपान की देती हैं सलाह :
अक्सर घर के कामकाज में महिलाएं अपनी सेहत का ध्यान नहीं रखती हैं, ऐसी महिलाओं को दीपा सेठ सोशल प्लेटफार्म पर खानपान की सलाह देती रहती हैं। उन्होंने योगा क्लास शुरू करके अपने व्यापार को गति दी है। दो दशक पहले खानपान और खुद को फिट रखने के प्रति महिलाएं जागरुक नहीं थी, तब यह काम शुरू किया था। रथयात्रा निवासी दीपा सेठ कहती हैं कि दो दशक पूर्व महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी विकारों को दूर करने के प्रयास में जुट गई थीं। खानपान की उचित सलाह और खुद को फिट रखने के लिए मोटिवेट करती थीं। तब इस काम को बहुत तवज्जो लोगों ने नहीं दी। समय बीतते देर नहीं लगी और अब वीडियो कॉल के जरिए लोग योगा क्लास करने के लिए तैयार रहते हैं।

चुनौतियां-
यह अलग तरह का काम था, हर कोई समझ नहीं पाता था।
महिलाएं काफी दिनों बाद जुड़ी।
कोई सरकारी सहायता भी नहीं मिली।

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पढ़ाकर बच्चों को बनाया काबिल :
खुद पर विश्वास है तो आप कई मुसीबतों से आगे बढ़ सकते हैं। परिवार की रूढ़िवादी सोच को बदला और ट्यूशन करके अपने बच्चों को काबिल बनाया। जिसकी समाज में आज काफी चर्चाएं होती हैं। चौक सुडिया निवासी शालिनी गोस्वामी बताती हैं कि दो दशक पहले परिवार में लोग काफी पुराने ख्यालात के थे, वह बच्चों को आगे की पढ़ाई के बिल्कुल पक्ष में नहीं थे। हालांकि मैने ठाना कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देनी है। इसलिए पति की अनुमति लेकर ट्यूशन पढ़ाने लगी। बच्चों को भी पढ़ाती और परिवार को भी संभालती। शुरू में तो बहुत विरोध हुआ लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़े और सफल होते गए तो फिर सभी की सोच बदल गई। बड़ा बेटा सीए औऱ छोटा बोर्ड में गया है। शालिनी कहती हैं कि महिलाओं का आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है।

चुनौतियां-
ससुराल में घर से बाहर निकलने की छूट नहीं थी।
घर पर ही कुछ बच्चों को पढ़ाना शुरू किया।
किसी भी तरह की कोई फीस भी बहुत नहीं थी।
घर, परिवार और बच्चों को संभालते हुए कोचिंग करना चुनौतीपूर्ण था।

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