फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Heritage in existence for a few dollars deal

चंद डॉलरों में धरोहर के वजूद का सौदा

Fri, 08 Jan 2016 02:07 AM IST
ब्यूरो, वाराणसी अमर उजाला
ब्यूरो, वाराणसी अमर उजाला Updated Fri, 08 Jan 2016 02:07 AM IST
विज्ञापन
Heritage in existence for a few dollars deal

भगवान बुद्ध  की उपदेश स्थली सारनाथ में मौजूद पवित्र चौखंडी स्तूप (पुरातात्विक) के वजूद की सौदेबाजी का खेल जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

विज्ञापन

 स्तूप की नींव और उसकी दीवारों से मिट्टी खोदकर उसे विदेशी सैलानियों को बेचा जा रहा है। चंद डॉलरों की लालच में इन धंधेबाजों ने पुरातात्विक धरोहर के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है।
विज्ञापन

विभिन्न देशों से आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं को आस्था के नाम पर स्तूप की मिट्टी बेचने और खुदे हुए स्थान पर चढ़ावा चढ़ाने की बात कहकर पैसे ऐंठे जाने की जानकारी सामने आने के बाद भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

जबकि, स्तूप के संरक्षण में लगे एएसआई के कर्मचारियों की मिलीभगत से ही यह खेल चल रहा है।
बुधवार को एक विदेशी सैलानी को मिट्टी दे रही स्तूप परिसर में काम करने वाली संविदा कर्मी मुन्नी देवी से जब मौके पर जुटे लोगों ने उस बारे में जानकारी की तो उसने बताया कि परिचर सुधीर ने उनसे मिट्टी खोदने को कहा और पॉलीथिन भी उसी ने दी थी।
चौखंडी स्तूप, यहां मिले अवशेष और साक्ष्यों के आधार पर यह मान्यता है कि भगवान बुद्ध की शिष्यों से पहली मुलाकात इसी स्थल पर हुई थी।
 इस स्तूप के दर्शन-पूजन के लिए भारत के कोने-कोने के अलावा बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालु यहां आते हैं। स्तूप के दर्शन के साथ ही इसकी परिक्रमा करते हैं।

एएसआई के ठीक ढंग से देख-रेख न करने के चलते कुछ महीने पहले दीवारों में जगह-जगह दरार आ गई थी। इसके बाद संरक्षण का कार्य शुरू हुआ।
अब इस पवित्र स्तूप पर एक अलग ही खतरा मंडराने लगा है। यहां सुरक्षा और देखरेख में लगे एएसआई के कर्मचारी ही इसके अस्तित्व के लिए खतरा बन गए हैं।
यहां आने वाले सैलानियों से कुछ स्थानीय लोग स्तूप की पवित्र मिट्टी का सौदा कर मोटी कमाई कर रहे हैं। मिट्टी भी कहीं और की नहीं, बल्कि नींव और दीवारों से निकालकर दी जाती है।
 कुछ लोग श्रद्धालुओं को मिट्टी देने के बाद खुदाई किए गए स्थान पर चढ़ावा भी चढ़वाते हैं। संरक्षण में लगे ही कर्मचारी ही बाकायदा पॉलीथिन में मिट्टी मुहैया करा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed