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बनारसः वसूली का चल रहा खेल, पुलिस की मेहरबानी से नो इंट्री में दौड़ रहे भारी वाहन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 24 Apr 2018 01:34 PM IST
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भारी वाहनों के चलने से खराब हुई सड़क
- फोटो : अमर उजाला
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पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में सड़कें लगातार धंस रही हैं और सड़कों पर बड़े-बड़े जानलेवा गड़ढे हो रहे हैं। कहीं पेयजल की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो रही है तो कहीं सीवर लाइन। इन सभी नुकसान की बड़ी वजह हैं शहर में नो एंट्री के बाद भी दौड़ते ओवरलोड वाहन।
वसूली के चक्कर में रात के समय ओवरलोड वाहनों को उन रास्तों पर भी दौड़ाया जा रहा है, जिनकी क्षमता उस भार को सहने की है ही नहीं। बानगी के रूप में मंडुवाडीह-महमूरगंज रथयात्रा मार्ग को आप देख सकते हैं। ओवरलोड वाहनों से यह सड़क जगह-जगह धंस गई है।
ऐसी ही स्थिति शहर के कई अन्य मार्गों की है। जबकि, कुछ परमिट वाले वाहनों को छोडकर बाकी सभी बड़े वाहनों के लिए नो इंट्री काफी पहले से जारी है। इसके बाद भी एक से डेढ़ हजार ट्रक पुलिस की मिलीभगत से शहर में चांदपुर चौराहा, लहरतारा, मंडुवाडीह, महमूरगंज या फिर ककरमत्ता, सुंदरपुर लंका होते हुए शहर में रोजाना प्रवेश कर रहे हैं।
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ऐसे में शहर की कम क्षमता वाली सड़कें इन ओवरलोड वाहनों से बदहाल हो रही हैं। प्रतिबंध के बाद भी भारी वाहनों की धड़ल्ले से आवाजाही पर सिविल और ट्रैफिक पुलिस के जिम्मेदारी अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप मढ़ रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर लापरवाही किसकी है और नो इंट्री में भारी वाहनों के प्रवेश का सिलसिला कब थमेगा।
यातायात विभाग के अनुसार मौजूदा नो इंट्री का निर्धारण 12 दिसंबर 2017 को किया गया था। इसके तहत इलाहाबाद की ओर से शहर में आने वाले सभी वाहनों को कपसेटी, बाबतपुर, तरना, चौकाघाट होते हुए शहर में प्रवेश करने का आदेश जारी हुआ, लेकिन चौकाघाट लहरतारा पुल निर्माण के चलते शहर में ट्रकों के प्रवेश के लिए कपसेठी, बाबतपुर, तरना, चौकाघाट रूट निर्धारित किया गया।
बावजूद इसके चंद पैसों की लालच में पुलिस कर्मी भारी वाहनों को कैंट रेलवे स्टेशन की ओर भेज दे रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रतिबंधित के बावजूद मंडुवाडीह ओवरब्रिज से भी भारी वाहनों को गुजारा जा रहा है। मल्टी एक्सल ट्रकों के गुजरने से कम क्षमता वाली सड़कें धंस जा रही हैं।
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वसूली के चक्कर में रात के समय ओवरलोड वाहनों को उन रास्तों पर भी दौड़ाया जा रहा है, जिनकी क्षमता उस भार को सहने की है ही नहीं। बानगी के रूप में मंडुवाडीह-महमूरगंज रथयात्रा मार्ग को आप देख सकते हैं। ओवरलोड वाहनों से यह सड़क जगह-जगह धंस गई है।
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ऐसी ही स्थिति शहर के कई अन्य मार्गों की है। जबकि, कुछ परमिट वाले वाहनों को छोडकर बाकी सभी बड़े वाहनों के लिए नो इंट्री काफी पहले से जारी है। इसके बाद भी एक से डेढ़ हजार ट्रक पुलिस की मिलीभगत से शहर में चांदपुर चौराहा, लहरतारा, मंडुवाडीह, महमूरगंज या फिर ककरमत्ता, सुंदरपुर लंका होते हुए शहर में रोजाना प्रवेश कर रहे हैं।
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ऐसे में शहर की कम क्षमता वाली सड़कें इन ओवरलोड वाहनों से बदहाल हो रही हैं। प्रतिबंध के बाद भी भारी वाहनों की धड़ल्ले से आवाजाही पर सिविल और ट्रैफिक पुलिस के जिम्मेदारी अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप मढ़ रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर लापरवाही किसकी है और नो इंट्री में भारी वाहनों के प्रवेश का सिलसिला कब थमेगा।
यातायात विभाग के अनुसार मौजूदा नो इंट्री का निर्धारण 12 दिसंबर 2017 को किया गया था। इसके तहत इलाहाबाद की ओर से शहर में आने वाले सभी वाहनों को कपसेटी, बाबतपुर, तरना, चौकाघाट होते हुए शहर में प्रवेश करने का आदेश जारी हुआ, लेकिन चौकाघाट लहरतारा पुल निर्माण के चलते शहर में ट्रकों के प्रवेश के लिए कपसेठी, बाबतपुर, तरना, चौकाघाट रूट निर्धारित किया गया।
बावजूद इसके चंद पैसों की लालच में पुलिस कर्मी भारी वाहनों को कैंट रेलवे स्टेशन की ओर भेज दे रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रतिबंधित के बावजूद मंडुवाडीह ओवरब्रिज से भी भारी वाहनों को गुजारा जा रहा है। मल्टी एक्सल ट्रकों के गुजरने से कम क्षमता वाली सड़कें धंस जा रही हैं।
रात में चलता है वसूली का खेल
टूटा गया मेनहोल का ढक्कन
- फोटो : अमर उजाला
शहर में ट्रकों को नो एंट्री में प्रवेश देने के लिए वसूली का खेल कोई नया नहीं। हर चौराहे पर पुलिस तैनात रहती है और वसूली के लिए एक अलग आदमी लगाया जाता है। जो ट्रकों से वसूली करके पुलिस कर्मियों तक पहुंचाता है। नो इंट्री से गुजरने के लिए प्रति ट्रक कम से कम 500 से एक हजार रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
एसपी ट्रैफिक सुरेश चंद्र रावत के अनुसार 12 दिसंबर से आवश्यक वस्तु सेवा के अलावा नगर निगम और पीडब्लूडी के ट्रकों को छोड़कर किसी भी ट्रक के प्रवेश पर प्रतिबंध है। यातायात पुलिस की ड्यूटी सुबह सात बजे से लेकर रात 10 बजे तक ही रहती है। इसके बाद थानों की पुलिस हर चौराहे पर ड्यूटी करती है। रात में किस रास्ते से ट्रकों को कैसे प्रवेश कराया जाता है। इससे हमारा कोई ताल्लुक नहीं है।
एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि रात में चौराहों पर थानों की पुलिस ड्यूटी करती है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस भी वहां तैनात रहती है। ऐसे में उनके निर्देश पर ही ट्रकों को शहर की सड़कों पर प्रवेश कराया जाता है। अगर प्रतिबंध है तो ट्रकों को लहरतारा की जगह कपसेठी से ही रोक दिया जाना चाहिए।
एसपी ट्रैफिक सुरेश चंद्र रावत के अनुसार 12 दिसंबर से आवश्यक वस्तु सेवा के अलावा नगर निगम और पीडब्लूडी के ट्रकों को छोड़कर किसी भी ट्रक के प्रवेश पर प्रतिबंध है। यातायात पुलिस की ड्यूटी सुबह सात बजे से लेकर रात 10 बजे तक ही रहती है। इसके बाद थानों की पुलिस हर चौराहे पर ड्यूटी करती है। रात में किस रास्ते से ट्रकों को कैसे प्रवेश कराया जाता है। इससे हमारा कोई ताल्लुक नहीं है।
एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि रात में चौराहों पर थानों की पुलिस ड्यूटी करती है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस भी वहां तैनात रहती है। ऐसे में उनके निर्देश पर ही ट्रकों को शहर की सड़कों पर प्रवेश कराया जाता है। अगर प्रतिबंध है तो ट्रकों को लहरतारा की जगह कपसेठी से ही रोक दिया जाना चाहिए।