गर्मी का कहर: काशी में 16 दिन में 100 से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक हुए बीमार; बाबा दरबार से पहुंच रहे अस्पताल
वाराणसी में मौसम की मार से लोग बीमार पड़ रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की कतार लगी है। इतना ही नहीं गर्मी से मौत के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं।
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इस भीषण गर्मी में बाबा के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों पर भी मौसम की मार पड़ रही है। दिन में तीखी धूप और लू का असर यह है कि हर दिन काशी विश्वनाथ धाम और दशाश्वमेध घाट सहित अन्य घाटों पर घूमने के लिए आने वाले छह से आठ लोगों की तबीयत बिगड़ रही है। अब तक इस महीने में 16 दिन में ही 100 से अधिक लोग बीमार होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। इसमें करीब 50 लोगों को विश्वनाथ धाम के गेट नंबर चार से लेकर मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं सोमवार की सुबह बाबा विश्वनाथ धाम में ड्यूटी के दौरान एक पुलिसकर्मी की तबीयत बिगड़ गई। जिसे इलाज के लिए मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मई की तरह ही जून में भी तपिश ने लोगों को बेचैन कर दिया है। सुबह आठ बजे ही धूप इतनी तेज हो रही है कि तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पहुंच जा रहा है। इस बीच अस्पतालों की ओपीडी में बीमार मरीजों के साथ ही मरने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। काशी विश्वनाथ धाम में दोपहर में दर्शन करने वालों की कतार लग रही है। इसमें बड़ों के साथ ही बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग शामिल हैं। गर्मी और लू की वजह से कोई चक्कर खाकर गिर रहा है तो किसी को सिरदर्द, तेज बुखार हो रहा है।
लाइन में खड़े-खड़े कई श्रद्धालुओं को बेचैनी हो रही है। रविवार को ही काशी विश्वनाथ धाम के चार नंबर गेट से एंबुलेंस से दो लोगों को मंडलीय अस्पताल ले जाया गया। बिहार और महाराष्ट्र वाले लोगों को उल्टी, दस्त के साथ ही चक्कर आने की समस्या थी। दशाश्वमेध घाट से तीन लोगों को मंडलीय अस्पताल ले जाया गया। पिछले दिनों महाराष्ट्र की एक बीजेपी नेता की तबीयत बिगड़ने के बाद उसकी मौत भी हो गई थी।
अस्पताल पहुंचने वालों में दक्षिण भारतीय अधिक
डॉक्टर बोले
अस्पताल की ओपीडी के साथ ही इमरजेंसी में पिछले 15 दिन में मरीजों की संख्या बढ़ी हैै। काशी विश्वनाथ धाम, गंगा घाट सहित अन्य जगहों से भी पांच से छह मरीज हर दिन आ रहे हैं। प्राथमिक उपचार के बाद चार से पांच घंटे में जब राहत मिल जाती है तो उन्हें डॉक्टर की सलाह पर घर भेज दिया जाता है। - डॉ. एसपी सिंह, एसआईसी मंडलीय अस्पताल
विश्वनाथ धाम में मैट न होने से जल रहे पांव, छांव भी नहीं
इमरजेंसी में 300 ने करवाया इलाज, 60 भर्ती, 17 की गई जान
रविवार को सुबह से लेकर रात तक गर्मी से परेशान होकर मंडलीय अस्पताल में 130 लोग पहुंचे। इसमें 30 को भर्ती किया गया। दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में आने वालों का आंकड़ा 100 के पार पहुंच गया। यहां 20 लोगों को भर्ती किया। इसके अलावा करीब 100 मरीज बीएचयू समेत अन्य अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज के लिए पहुंचे। इनमें उल्टी-दस्त के साथ ही बेचैनी, सिरदर्द, चक्कर आनेे, बुखार की समस्या थी। यहां 30 से अधिक लोगों को भर्ती किया गया।
मंडलीय अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसपी सिंह के अनुसार रविवार को इमरजेंसी में जिन 9 लोगों की मौत हुई हैं, उसमें चार लावारिस जबकि पांच ने अस्पताल के गेट पर पहुंचते ही दम तोड़ दिया। उन्हें इमरजेंसी में मृत घोषित किया गया। उधर जिला अस्पताल में मरने वाले चार लोगों में चौबेपुर निवासी धन्नू (45), सारनाथ निवासी शिवमूरत यादव (75) और गाजीपुर निवासी सर्वजीत (75) के साथ ही एक अज्ञात मरीज शामिल था।
उधर, कैंट रेलवे स्टेशन पर रविवार की शाम अचानक एक यात्री की मौत हो गई। प्लेटफार्म संख्या दो पर काफी देर तक उसका शव पड़ा रहा। एक यात्री प्रगति ने एक्स पर शिकायत दर्ज कराई और आरपीएफ व जीआरपी ने शव को कब्जे में लिया। उसने अपनी शिकायत में बताया कि एक घंटे से वह व्यक्ति छटपटा रहा था। सांस लेने की कोशिश कर रहा था। मगर, चिकित्सक को भी नहीं बुलाया गया। यदि समय रहते कोई आया होता तो शायद जान बच सकती थी। जीआरपी प्रभारी निरीक्षक हेमंत सिंह ने बताया कि यात्री को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शिनाख्त का प्रयास किया जा रहा है। ऐसा कोई वस्तु या पेपर नहीं मिला कि उसकी पहचान हो सके। शव को मोर्चरी में रखवाया गया है।