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Gyanvapi Case: ज्ञानवापी से जुड़े तीन मामले में सुनवाई टली, अब तीन सितंबर को होगी सुनवाई

Mon, 29 Aug 2022 08:22 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 29 Aug 2022 08:22 PM IST
सार

ज्ञानवापी से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों में सोमवार को सुनवाई टल गई। इसमें एक वाद में तीन सितंबर, दूसरे में पांच सितंबर जबकि एक अन्य वाद में 10 सितंबर की तिथि अदालत ने नियत कर दी है।

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Hearing postponed in three cases related to Gyanvapi in varanasi court
वाराणसी कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों में सोमवार को सुनवाई टल गई। इसमें एक वाद में तीन सितंबर, दूसरे में पांच सितंबर जबकि एक अन्य वाद में दस सितंबर की तिथि अदालत ने नियत कर दी है।  सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत में सोमवार को मुख्तार अहमद अंसारी और अन्य चार वादी की तरफ से दाखिल वाद पर सुनवाई टल गई।

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अब इस मामले में अगली सुनवाई के लिए तीन सितबर की तिथि नियत की गई है। इस मामले एडवोकेट रमेश उपाध्याय और सत्यप्रकाश श्रीवास्तव ने ऑर्डर 1 रूल 10 के तहत अलग-अलग पक्षकार बनाने के लिए अर्जी दी। मुख्तार अहमद अंसारी, अनीसुर रहमान, तीन अन्य ने वाद दाखिल कर राज्य सरकार, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद, डीएम और पुलिस आयुक्त को पक्षकार बनाया था।
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अर्जी में कोर्ट से गुजारिश की गई है कि विपक्षीगण को मना किया जाए कि ज्ञानवापी परिसर स्थित तीन दृश्य मजार और अदृश्य मजार चादर चढ़ाने, वार्षिक उर्स का आयोजन करने का अधिकार से वंचित नहीं किया जाए।  इसी कोर्ट में अविमुक्तेश्वर भगवान आदि की तरफ से दाखिल वाद पर सुनवाई टल गई। इस मामले में अगली सुनवाई के लिए दस सितंबर की तिथि नियत की गई।

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अविमुक्तेश्वर भगवान की तरफ से हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता व खजुरी निवासी अजीत सिंह ने अधिवक्ता के जरिये वाद दाखिल कर कहा गया था की भगवान अविमुक्तेश्वर आदि मस्जिद के नीचे विराजमान हैं। उनके पूजापाठ राग भोग भजन कीर्तन धार्मिक अनुष्ठान आयोजन अनुमति की मांग की गई है। 

वहीं सिविल जज सीनियर डिविजन कुमुद लता त्रिपाठी की अदालत में सोमवार को ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की आकृति की पूजा-भोग आरती करने को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से दाखिल अर्जी पर सुनवाई टल गई। इस मामले में पांच सितंबर की तिथि नियत की है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व रामसजीवन ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में दिए प्रार्थना पत्र में कहा कि  श्रृंगार गौरी प्रकरण में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के आदेश पर हुए कोर्ट कमीशन की कार्यवाही में मिली शिवलिंग आकृति का राजभोग, पूजन व आरती जिला प्रशासन की ओर से विधिवत करना चाहिए था, लेकिन अभी तक प्रशासन ने ऐसा नहीं किया है।

उन्होंने बताया कि कानूनन देवता की परिस्थिति जीवत बच्चा के समान होती है। जिसे अन्न-जल आदि नहीं देना संविधान की धारा अनुच्छेद-21 के तहत दैहिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार का उल्लंघन है, पूजा पाठ की मांग की गई है।

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