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Varanasi: ज्ञानवापी परिसर हिंदुओं को सौंपने की मांग पर नहीं हो सकी सुनवाई, सात जनवरी नई तारीख

Wed, 21 Dec 2022 05:33 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Wed, 21 Dec 2022 05:33 PM IST
सार

आदि विश्वेश्वर का मालिकाना हक तय करने, ज्ञानवापी परिसर हिंदुओं को सौंपने और श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन की मांग वाली याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई किए जाने के आवेदन पर सुनवाई अब सात जनवरी को होगी। 

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Hearing could not on demand of handing over Gyanvapi campus to Hindus in varanasi court
वाराणसी कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी आदि विश्वेश्वर का मालिकाना हक तय करने, ज्ञानवापी परिसर हिंदुओं को सौंपने और श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन की मांग वाली याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई किए जाने के आवेदन पर सुनवाई बुधवार को समयाभाव के कारण नहीं सकी। जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने सुनवाई कई अगली तिथि सात जनवरी निर्धारित की है।

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इससे पहले मंलवार को श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन और अन्य विग्रहों के संरक्षण की मांग मामले की वादिनी सीता साहू, लक्ष्मी देवी, मंजू देवी और रेखा पाठक की ओर से जिला जज की अदालत में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु जैन ने दलील रखी। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी से संबंधित मुकदमों को अपने पास स्थानांतरित कर एक साथ सुनवाई की जाए, क्योंकि सभी मुकदमों में विधि व तथ्य समान हैं। सभी मुकदमों को एक साथ सुना जाए।

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ज्ञानवापी से जुड़े मुकदमों में पक्षकार भी अलग-अलग
जवाब में किरन सिंह की तरफ से अधिवक्ता मानबहादुर सिंह, शिवम गौड़, अनुपम द्विवेदी ने दलील रखी। उन्होंने कहा कि श्रृंगार गौरी मामले की वादी महिलाओं को स्थानांतरण आवेदन देने का कोई अधिकार नहीं है। वे किसी अन्य मुकदमे में पक्षकार भी नहीं हैं। ऐसे में सीपीसी की धारा 24 में स्थानांतरण आवेदन देने का कोई अधिकार नहीं है। ज्ञा

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ज्ञानवापी से जुड़े मुकदमों में अनुतोष अलग-अलग हैं। पक्षकार भी अलग-अलग हैं। ऐसे में न इनके मामले एकीकृत किए जा सकते हैं और न ही स्थानांतरित किए जा सकते हैं। अदालत में दलील जारी है। बता दें कि किरन सिंह की तरफ से दाखिल वाद में भगवान आदि विश्वेश्वर का ज्ञानवापी का मलिकाना हक और तथाकथित मस्जिद के गुंबद को हटाकर कब्जा दिए जाने की मांग की गई है। 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर हुई सुनवाई

सिविल जज सीनियर डिविजन अश्वनी कुमार की अदालत में  स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर भी बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान वादी की तरफ से कहा गया कि जब तक इस वाद का निर्णय नहीं हो जाता तबतक के लिए अंतरिम आदेश पारित कर दर्शन,पूजन, राग, भोग की अनुमति दी जाए।

अदालत ने इस पर सुनवाई  की तिथि  23 जनवरी तय करते हुए सभी पक्षकारों से मौजूद रहने को कहा। बता दें कि ज्ञानवापी परिसर में सर्वे के दौरान मिले शिवलिंग जैसी आकृति को आदि विश्वेश्वर बताते हुए नियमित पूजा-पाठ, राग-भोग के लिए यह वाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से दाखिल किया गया है।

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