काशी विद्यापीठः स्नातक में सर्वोच्च अंक पाने वाले को मिलेगा हर प्रसाद गुप्त स्वर्ण पदक, कार्यपरिषद ने लिया निर्णय
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में स्नातक में सर्वोच्च अंक पाने वाले मेधावी को अब ओवर आल चैंपियन का स्वर्ण पदक मिलेगा।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में स्नातक में सर्वोच्च अंक पाने वाले मेधावी को ओवर आल चैंपियन का स्वर्ण पदक हर प्रसाद गुप्त के नाम पर दिया जाएगा। बृहस्पतिवार को हुई कार्यपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। विश्वविद्यालय के 43वें दीक्षांत समारोह से इसकी शुरुआत हो जाएगी।
बृहस्पतिवार को कुलपति प्रो. एके त्यागी की अध्यक्षता में केंद्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में कार्यपरिषद की बैठक हुई। इसमें स्नातकोत्तर की तरह स्नातक स्तर पर सर्वोच्च अंक पाने वाले मेधावी को स्वर्ण पदक देने का निर्णय लिया गया। 10 दिसंबर को आयोजित होने वाले 43वें दीक्षांत समारोह में स्नातक स्तर पर भी सर्वोच्च अंक हासिल करने वाले छात्र को हर प्रसाद गुप्त गोल्ड मेडल प्रदान किया जाएगा।
कार्यपरिषद की बैठक में अजय आदित्य के अनुरोध पर एमएफए में सर्वोच्च अंक हासिल करने वाले छात्र को स्व. डॉ. शरद बंसल के नाम से गोल्ड मेडल देने की भी सहमति प्रदान की गई। ऐसे में अब एमएफए में सर्वोच्च अंक हासिल करने वाले छात्र को दो-दो मेडल मिलेगा।
अब गोल्ड मेडल की संख्या हो सकती है 57
वहीं विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में अब गोल्ड मेडल की संख्या 57 होने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा 15 अध्यापकों के स्थायीकरण, वित्त समिति व विद्या परिषद की संस्तुतियों को भी कार्यपरिषद में मंजूरी मिल गई है। कार्यपरिषद ने संबद्ध महाविद्यालयों की संबद्धता नियमानुसार पूरा कर लेने के उपरांत अनुमोदन प्रदान किया ।
संबद्धता के लिए विलंब शुल्क माफ
कोरोना महामारी के कारण इस बार कई कालेजों ने संबद्धता के विस्तारीकरण में विलंब कराया है। ऐसे महाविद्यालयों को इस वर्ष अर्थदंड से मुक्त कर दिया गया है। अगले वर्ष से विलंब होने पर बतौर अर्थदंड कालेजों को पचास हजार रुपये जमा करना होगा।
भारतरत्न डॉ. भगवानदास की मूर्ति फिर से होगी स्थापित
विश्वविद्यालय परिसर स्थित केंद्रीय पुस्तकालय के सामने पार्क में भारतरत्न डॉ. भगवानदास की मूर्ति करीब एक दशक पहले चोरी हो गई थी। कार्य परिषद ने इस स्थान पर नई प्रतिमा लगाने की स्वीकृति प्रदान कर दी है।
राष्ट्ररत्न के छोटे भाई थे हर प्रसाद
स्नातक में ओवरऑल सर्वोच्च अंक हासिल करने वाले विद्यार्थी को हर प्रसाद के नाम पर स्वर्ण पदक प्रदान किया जाएगा। हर प्रसाद राष्ट्ररत्न बाबू शिव प्रसाद गुप्त के छोटे भाई थे। उनका निधन बाल्यावस्था में ही हो गया था। बाबू शिव प्रसाद ने काशी विद्यापीठ को संचालित करने के लिए छोटे भाई के नाम से ही ट्रस्ट बनाया था। यही नहीं उन्होंने भाई की आधी संपत्ति (करीब बीस लाख रुपये) हर प्रसाद ट्रस्ट को दान कर दी थी ताकि प्रतिवर्ष उसके 40 हजार रुपये के ब्याज से संस्था का संचालन हो सके।