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हनुमत दरबार में राम की शक्ति पूजा
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Fri, 10 Apr 2015 02:31 AM IST
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संकट मोचन संगीत समारोह के इतिहास में गुरुवार की रात पहली बार लीक तोड़कर महाकवि निराला की कविता को नृत्य नाटिका के भावों में संजोकर मिसाल कायम की गई। राम की शक्ति पूजा को संगीत के साथ अभिनय से संवारा रूपवाणी के कलाकारों ने। नृत्यमय आराधना की राम-रावण युद्ध से हुई शुरुआत शक्ति और सत्य के मिलन के निष्कर्ष पर पहुंची तो जयकारे लगने लगे।
पखावज पर भवानी शंकर ने तालनाद से सबको झकझोर दिया तो अजय चक्रवर्ती की रेशमी गायकी ने लोगों के मन को मोह लिया। आधी रात के बाद विश्वमोहन भट्ट ने मोहन वीणा के तार छेड़े। शुरुआत हुई रूपवाणी के कलाकारों की नृत्यनाटिका राम की शक्ति पूजा से। गायन, वादन और नृत्य के इस स्थापित मंच पर नाट्य मंचन का अलग अनुभवन दर्शकों के चेहरे पर साफ दिख रहा था।
राम की सेना में फैली निराशा और खिन्नता से मायूस राम ने दुर्गा को रावण की ओर से लड़ते देख लिया। इस स्थिति ने अपनी प्रिया सीता की याद राम के दुख को और घना बना दिया। अब तक उन्होंने ताड़का, सुबाहू, मारीच, खर-दूषन का वध कर दिया है लेकिन प्रेम-पराक्रम की याद से भी राम का दुख कम नहीं हुआ अंतत: उन्होंने देवी की आराधना की। राम के रूप में स्वाति, सीता बनीं अंजना और दुर्गा का स्वरूप नंदिनी ने धारण किया। व्योमेश शुक्ल निर्देशित इस नृत्य नाटिका में संगीत जेपी शर्मा ने दिया जबकि गायन आशीष मिश्र ने किया।
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रूप सज्जा डॉ, शकुंतला शकुंतला शुक्ला ने की। इनके बाद गायक रतन मोहन शर्मा मंच पर आए। उन्होंने राग विहाग की अवतारणा की। तबले पर राम कुमार मिश्र और हारमोनियम पर दिनकर शर्मा ने उनका साथ दिया। इनके बाद उस्ताद अल्ला रक्खा के पुत्र फजल कुरैशी और पं. भवानी शंकर की युगलबंदी यादगार बन गई। हारमोनियम पर लहरा दिया पं. धर्मनाथ मिश्र ने। फिर बारी आई अजय चक्रवर्ती की। उन्होंने राग काफी खयाल ‘मोरे मन में बसो राम अभिराम..’ सुनाया। तबले पर संगत की कुमार बोस ने। तानपूरे पर ब्रजेंदर चक्रवर्ती और हारमोनियम पर धर्मनाथ थे। संचालन हरिराम द्विवेदी ने किया।
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पखावज पर भवानी शंकर ने तालनाद से सबको झकझोर दिया तो अजय चक्रवर्ती की रेशमी गायकी ने लोगों के मन को मोह लिया। आधी रात के बाद विश्वमोहन भट्ट ने मोहन वीणा के तार छेड़े। शुरुआत हुई रूपवाणी के कलाकारों की नृत्यनाटिका राम की शक्ति पूजा से। गायन, वादन और नृत्य के इस स्थापित मंच पर नाट्य मंचन का अलग अनुभवन दर्शकों के चेहरे पर साफ दिख रहा था।
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राम की सेना में फैली निराशा और खिन्नता से मायूस राम ने दुर्गा को रावण की ओर से लड़ते देख लिया। इस स्थिति ने अपनी प्रिया सीता की याद राम के दुख को और घना बना दिया। अब तक उन्होंने ताड़का, सुबाहू, मारीच, खर-दूषन का वध कर दिया है लेकिन प्रेम-पराक्रम की याद से भी राम का दुख कम नहीं हुआ अंतत: उन्होंने देवी की आराधना की। राम के रूप में स्वाति, सीता बनीं अंजना और दुर्गा का स्वरूप नंदिनी ने धारण किया। व्योमेश शुक्ल निर्देशित इस नृत्य नाटिका में संगीत जेपी शर्मा ने दिया जबकि गायन आशीष मिश्र ने किया।
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रूप सज्जा डॉ, शकुंतला शकुंतला शुक्ला ने की। इनके बाद गायक रतन मोहन शर्मा मंच पर आए। उन्होंने राग विहाग की अवतारणा की। तबले पर राम कुमार मिश्र और हारमोनियम पर दिनकर शर्मा ने उनका साथ दिया। इनके बाद उस्ताद अल्ला रक्खा के पुत्र फजल कुरैशी और पं. भवानी शंकर की युगलबंदी यादगार बन गई। हारमोनियम पर लहरा दिया पं. धर्मनाथ मिश्र ने। फिर बारी आई अजय चक्रवर्ती की। उन्होंने राग काफी खयाल ‘मोरे मन में बसो राम अभिराम..’ सुनाया। तबले पर संगत की कुमार बोस ने। तानपूरे पर ब्रजेंदर चक्रवर्ती और हारमोनियम पर धर्मनाथ थे। संचालन हरिराम द्विवेदी ने किया।