Gyanvapi Case: ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले की सुनवाई चार अगस्त तक टली, मुस्लिम पक्ष करेगा जवाबी बहस
वाराणसी के ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी प्रकरण की अगली सुनवाई जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में चार अगस्त को होगी।
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वाराणसी के ज्ञानवापी स्थित मां श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन के लिए दाखिल वाद सुनवाई योग्य है या नहीं इसपर सोमवार को होने वाली सुनवाई टल गई। अब इस मामले में चार अगस्त को सुनवाई होगी। सोमवार को होने वाली सुनवाई में अंजुमन इंतजामिया को जवाबी बहस करनी थी लेकिन एक अधिवक्ता के निधन के कारण सुनवाई की तारीख पहले टल कर 27 जुलाई हुई।
फिर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हरिशंकर जैन और अंजुमन मसाजिद के अधिवक्ता रईस अहमद के अनुरोध पर अदालत ने सुनवाई की तिथि चार अगस्त तय कर दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत वाद की पोषणीयता पर 23 मई से लेकर अब तक कई तारीखों पर सुनवाई कर चुकी है।
मामले में हिंदू पक्ष का दावा है कि श्रृंगार गौरी का मुकदमा सुनवाई योग्य है। वहीं, मुस्लिम पक्ष का दावा है कि मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है। सबसे पहले ऑर्डर 7 रूल 11 के आवेदन पर मुस्लिम पक्ष अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने दिनों तक दलीलें पेश कीं।
फिर हिंदू पक्ष के चार महिला वादियों की सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु जैन, सुधीर त्रिपाठी, सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने तीन दिनों तक दलीलें पेश कीं। इसके बाद वादिनी राखी सिंह की तरफ से शिवम गौड़, मानबहादुर, अनुपम द्विवेदी ने दलीलें पेश की।
इसके अलावा डीएम, पुलिस आयुक्त और प्रदेश के मुख्य सचिव की तरफ से डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पांडेय प्रसाद ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अदालत की ओर से पहले जारी सभी आदेश का पालन कराया गया है। आगे भी न्यायालय की ओर से जो आदेश होगा उसके अनुपालन के लिए शासन व प्रशासन प्रतिबद्ध है।
मुस्लिम पक्ष जहां अपनी दलीलों में यह साबित करता रहा कि ज्ञानवापी परिसर में विशेष धर्म उपासना स्थल एक्ट 1991 लागू होता है और वक्फ सम्पत्ति होने के कारण इस कोर्ट को सुनवाई का अधिकार नहीं है। वहीं हिंदू पक्ष यह दलील देता रहा कि यहां विशेष उपासना स्थल एक्ट 1991 लागू नहीं होता क्योंकि 1993 के पहले यहां पूजा-पाठ होता था।
विश्वनाथ मंदिर एक्ट बनने के बाद आराजी संख्या 9130 की पूरी सम्पत्ति देवता में समाहित हो गई और वक्फ बोर्ड रजिस्ट्रेशन का कोई प्रमाण नहीं है। ज्ञानवापी की संपत्ति शहर में है जबकि रजिस्ट्रेशन में मंडुआडीह देहात में बताया गया है। बता दें कि बुजुर्ग अधिवक्ता कमलाकांत पटेल के निधन के बाद बार एसोसिएशन द्वारा पारित शोक प्रस्ताव को देखते हुए सुनवाई टली है।