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Gyanvapi Case: हिंदू पक्ष ने कोर्ट में कहा- देवता की संपत्ति नष्ट नहीं होती, मंदिर टूट जाने से अस्तित्व समाप्त नहीं होगा, आज भी होगी सुनवाई

Fri, 15 Jul 2022 11:36 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 15 Jul 2022 11:36 AM IST
सार

वाराणसी के ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन को लेकर दायर याचिका में गुरुवार को भी जिला जज की अदालत में लगातार तीसरे दिन भी सुनवाई हुई। करीब दो घंटे में तक चली सुनवाई में हिंदू पक्ष ने अपना पक्ष रखा। 

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वाराणसी कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन के मुकदमे में जिला जज की अदालत में गुरुवार को हिंदू पक्ष ने तीसरे दिन भी दलीलें जारी रखीं। इसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की नजीरों का हवाला देते हुए अदालत में कहा कि देवता की संपत्ति एक बार उनके पक्ष में निहित हो गई, उसके बाद कभी समाप्त नहीं होगी। कयामत आने तक वह संपत्ति देवता के नाम पर ही चलती रहेगी।

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अदालत ने बहस जारी रखते हुए सुनवाई की तारीख 15 जुलाई नियत की है। जिला जज की अदालत में हिंदू पक्ष की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन ने श्री राम जन्मभूमि के केस में सुप्रीम कोर्ट की नजीर का हवाला दिया और कहा कि देवता की संपत्ति नष्ट नहीं होती, मंदिर टूट जाने से उसका अस्तित्व समाप्त नहीं होगा, उसका आध्यात्मिक स्वरूप बरकरार रहेगा।
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उन्होंने 1937 में बीएचयू के प्रोफेसर ए एस एलटेकर की पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि पुस्तक में मंदिर टूट जाने के बाद इस बात का जिक्र है कि वहां क्या-क्या बचा है और कहां पूजा हो रही है। अदालत में बहस के दौरान हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं ने दीन मोहम्मद के केस को अदालत के समक्ष रखा और कहा कि 15 गवाहों ने बताया था कि ज्ञानवापी परिसर में पूजा होती रही और 1993 तक व्यास जी पूजा करते थे, जिसे बैरिकेडिंग कर सील किया गया था।

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वक्फ बोर्ड की संपत्ति का कोई सवाल ही नहीं

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हिंदू पक्ष के अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु जैन - फोटो : अमर उजाला

यह भी कहा कि अप्रत्यक्ष देवता भी हिंदू लॉ में मान्य है, जो देवता हटा दिए गए, उनके हट जाने से भी देवता का स्थान वही रहता है। वक्फ प्रॉपर्टी के संबंध में उन्होंने दलील दी कि मुस्लिम लॉ में स्पष्ट है कि जो प्रॉपर्टी वक्फ को दी जाती है, वह मालिक द्वारा ही दी जा सकती है। इसमें कोई भी वक्फ डीड नहीं है और न ही वक्फ संपत्ति से जुड़ा कोई सबूत न्यायालय में पेश किया गया। 

अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने बताया कि 1937 में जो दीन मोहम्मद का फैसला हुआ, वह सभी पर बाध्यकारी नहीं है, क्योंकि उसमें हिंदू पक्षकार ही कोई नहीं था। अदालत ने नियमित बहस जारी रखते हुए सुनवाई की तारीख 15 जुलाई नियत कर दी।

वादी का संशोधन आवेदन स्वीकार, विपक्ष की आपत्ति खारिज

ज्ञानवापी में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगाने और परिसर हिंदुओं को सौंपने के मामले में बृहस्पतिवार को वादी किरण सिंह के संशोधन आवेदन को सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही विपक्ष की आपत्ति को अनौपचारिक मानते हुए खारिज भी किया है। इस मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख 21 जुलाई नियत की गई है।
 

विश्व वैदिक सनातन संस्था के जितेंद्र सिंह बिसेन की पत्नी किरण सिंह की ओर से अदालत में वाद दाखिल कर मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक, ज्ञानवापी हिंदुओं को सौंपने और परिसर में मिले शिवलिंग के दर्शन पूजन राग भोग की अनुमति मांगी गई है। इस वाद में कुछ शब्दों के संशोधन की अनुमति अदालत से मांगी गई थी, जिसे अदालत ने तीन दिन में संशोधित करने का आदेश दिया है।

इस मामले में हिंदू पक्ष की तरफ से पैरवी में मान बहादुर सिंह, शिवम गौड़, अनुपम द्विवेदी, अनुष्का तिवारी और अंजुमन इंतजामिया की तरफ से अभय नाथ यादव, रईस अहमद, मुमताज अहमद, मिराजुद्दीन सिद्दीकी व एखलाक अहमद और शासन की तरफ से डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पांडेय मौजूद रहे।
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