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Gyanvapi Mosque: मुस्लिम पक्ष बोला- यह न्यायोचित नहीं, हम ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे

Mon, 12 Sep 2022 06:40 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 12 Sep 2022 06:40 PM IST
सार

जिला जज की अदालत ने ज्ञानवापी परिसर में मौजूद मां श्रृंगार गौरी मंदिर में पूजा की अनुमति देने वाली याचिका को सुनवाई योग्य माना है। मुस्लिम पक्ष ने इसे न्यायोचित नहीं बताया है। 

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Gyanvapi case Verdict Muslim side said this decision is not justified we will approach High court
अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी के अधिवक्ता मेराजुद्दीन सिद्दीकी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी के ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और अन्य विग्रहों के संरक्षण मामले में जिला अदालत ने सोमवार को हिंदू पक्ष के हक में आदेश दिया है। जिला जज की अदालत ने ज्ञानवापी परिसर में मौजूद मां श्रृंगार गौरी मंदिर में पूजा की अनुमति देने की मांग वाली याचिका को सुनवाई योग्य माना है।

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जिला जज डॉ. एके विश्वेश ने मुस्लिम पक्ष की अपील खारिज कर दी। अब अगली सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की गई है। कोर्ट के इस फैसले से मुस्लिम पक्ष असंतुष्ट है। मुस्लिम पक्ष के वकील मेराजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा है कि यह फैसला न्यायोचित नहीं है।
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उन्होंने कहा, हम इसके खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। जज साहब ने यह आदेश 1991 के संसद के कानून को दरकिनार कर दिया है। ऊपरी अदालत के दरवाजे हमारे लिए खुले हैं। न्यायपालिका आपकी है। आप संसद के नियम को नहीं मानेंगे।

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यह सत्य की जीत है

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हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन - फोटो : अमर उजाला

जिला जज के आदेश के बाद हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने इसे सत्य की जीत करार दिया। उन्होंने कहा, अब हम आर्कियोलॉजिकल सर्वे की मांग करेंगे। कमीशन की कार्यवाही में काफी हद तक स्थिति साफ हो चुकी है। हम ज्ञानवापी की सच्चाई सामने लाने के लिए सभी तथ्यों को अदालत में रखेंगे। आगे भी हमारी जीत निश्चित है।

पोषणीयता पर सबसे लंबी सुनवाई हुई

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वाराणसी कोर्ट परिसर के बाहर जश्न मनाते हिंदू पक्ष के लोग - फोटो : अमर उजाला

ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी विवाद में पोषणीयता के मामले में वाराणसी के जिला जज एके विश्वेश की अदालत में बीते 24 अगस्त को सुनवाई पूरी हुई थी। सिविल के अभी तक के मामलों में पोषणीयता के मुकदमे में सबसे लंबी सुनवाई हुई है। इस मामले में रूल 7/11 लागू होगा या रूल 6/11 लागू होगा, इसी बात की मुख्य बहस पर 21 दिन की सुनवाई हुई।

यह मामला है बेहद खास

यूं तो काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर छह से ज्यादा मुकदमे अलग-अलग अदालतों में लंबित हैं। हालांकि यह मामला बेहद खास है क्योंकि तत्कालीन सिविल जज रवि कुमार दिवाकर ने इसी मामले पर कमीशन के आदेश जारी किए थे। इसके बाद ज्ञानवापी मस्जिद के पूरे परिसर की कमीशन की कार्यवाही की गई थी।

इसी कमीशन की कार्यवाही के दौरान मस्जिद के बजूखाने में शिवलिंग के होने का दावा किया गया। हालांकि मुस्लिम पक्ष ने इसे फव्वारा बताया था। विवाद इतना बढ़ा की इस कमीशन की कार्यवाही के खिलाफ अंजुमन इंतेजामिया कमेटी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिला अदालत में सुनवाई हुई। सोमवार को हिंदू पक्ष के हक में फैसला आया।

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