Gyanvapi Case: विशेष आयुक्त आज जमा करेंगे अपनी सर्वे रिपोर्ट, ज्ञानवापी मस्जिद के वजू खाने और शौचालय हटाने पर भी सुनवाई
तत्कालीन अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्रा ने छह व सात मई की कोर्ट कमीशन कार्यवाही की रिपोर्ट बुधवार को न्यायालय में पेश कर दी है। बाकी तीन दिन की कार्यवाही की रिपोर्ट विशेष कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह द्वारा जमा की जानी है।
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वाराणसी में सिविल जज सीनियर डिवीजन न्यायालय के आदेशानुसार प्राचीन आदि विश्वेश्वर परिसर के बारे में राखी सिंह आदि बनाम उत्तर प्रदेश सरकार आदि वाद में कोर्ट कमीशन द्वारा वीडियोग्राफी कराने के निर्देश दिए गए थे। तत्कालीन अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्रा ने छह व सात मई की कोर्ट कमीशन कार्यवाही की रिपोर्ट बुधवार को न्यायालय में पेश कर दी है।
इस तरह कोर्ट कमीशन की आंशिक कार्यवाही न्यालालय में जमा हो गई है। बाकी तीन दिन की कार्यवाही की रिपोर्ट विशेष कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह द्वारा जमा की जानी है, जिसे 19 मई को जमा किये जाने की पूर्ण संभावना है। इधर, ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिलने के दावे सहित सभी मुद्दों पर आपत्ति तलब कर निपटारे और कमीशन की रिपोर्ट जमा करने के लिए अदालत में आज सुनवाई होगी।
बुधवार को अधिवक्ताओं की हड़ताल के चलते सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर के चेंबर में न्यायिक प्रक्रिया पूरी हुई। वादी पक्ष की ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने व शौचालय को हटाने की मांग, प्रतिवादी पक्ष की आपत्ति पर सुनवाई बृहस्पतिवार को होगी। इसके साथ ही अदालत ने 19 मई को ही कमीशन की कार्यवाही की रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
डीजीसी और अंजुमन इंतजामिया दाखिल करेंगे आपत्ति
इस पर मुद्दे पर प्रतिवादी पक्ष के आवेदन को स्वीकार करते हुए 19 मई की तिथि तय की है। अदालत में वादी पक्ष की ओर से बुधवार को एक और आवेदन दिया गया, इसमें छह व सात मई को हुई कमीशन की कार्यवाही की रिपोर्ट हटाए गए अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्रा के माध्यम से जमा कराने की मांग की।
इस पर भी अदालत ने डीजीसी और अंजुमन इंतजामिया से आपत्ति मांगी है। साथ ही डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पांडेय ने एक आवेदन देकर मछलियों को संरक्षित रखने और वजू स्थल व शौचालय हटाने के लिए मंगलवार को दिए गए आवेदन के निस्तारण का अनुरोध किया। अदालत ने इन सभी मुद्दों पर विपक्षियों से आपत्ति तलब कर निस्तारण के लिए और कमीशन की रिपोर्ट दाखिल करने की तिथि 19 मई नियत कर दी है।
तत्कालीन अधिवक्ता आयुक्त ने प्रशासन पर लगाया असहयोग का आरोप
तत्कालीन अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्रा ने अपनी रिपोर्ट में सात मई को हुई कमीशन की कार्यवाही में प्रतिवादी प्रदेश सरकार, जिलाधिकारी व पुलिस आयुक्त्त पर असहयोग का आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा है कि सात मई को 100 से ज्यादा मुस्लिम पक्ष बैरिकेड के दूसरी तरफ मौजूद थे, उनके इकट्ठा होने के बाद शासन व पुलिस ने आगे की कार्यवाही में सहयोग पर असमर्थता जाहिर की।
इसके कारण कमीशन की कार्यवाही मुकम्मल रूप से नहीं की जा सकी।सात मई को शुरू हुई कमीशन की कार्यवाही में एक पक्षकार अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की गैर मौजूदगी में शुरू हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि खंडित देव विग्रह, मंदिरों का मलबा, हिंदू देवी-देवताओं की कलाकृति, कमल की आकृति शिलापट्ट आदि की फोटो व वीडियोग्राफी कराई गई है।
कार्यवाही के दौरान विवादित पश्चिमी दीवार की तरफ सिंदूर लगी तीन कलाकृतियों का पत्थर और चौखट को शृंगार गौरी का प्रतीक मानकर पूजे जाने के सवाल पर वादी पक्षों ने बताया मौके पर बताया था कि बैरिकेडिंग के अंदर स्थित उनके मुख्य मंदिर व अवशेष तक जाना प्रतिबंधित है।
एडवोकेट कमिश्नर ने कहा दो दिन की कार्यवाही की वीडियोग्राफी कोर्ट के आदेश पर कोषागार में सुरक्षित लॉक में रखी गई है। यहां बता दें कि सात मई को कमीशन की अधूरी कार्यवाही पर 12 मई को न्यायालय ने अधिवक्ता आयुक्त के साथ ही विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह और सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह को नियुक्त किया था। इसके बाद 17 मई को अदालत ने अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्रा को अधिवक्ता आयुक्त के पद से मुक्त कर दिया है।