Gyanvapi Case: आस्था को ठेस पहुंचाने के मामले में जावेद ने किया आत्मसमर्पण, शिवलिंग मिलने के दावे पर की थी टिप्पणी
सपा महानगर अध्यक्ष (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) जावेद अख्तर ने 17 मई को ज्ञानवापी प्रकरण को लेकर सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी की थी। वादी ने इसे हिंदू धर्म की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला बयान बताते हुए जैतपुरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
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वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में वजूखाने के पास शिवलिंग मिलने के दावे पर हिंदू धर्म की आस्था को ठेस पहुंचाने के मामले में आरोपी सपा महानगर अध्यक्ष (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) जावेद अख्तर ने मंगलवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट निधि पांडेय की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।
अदालत ने जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए इसे जमानतीय अपराध माना और 30-30 हजार रुपये की दो जमानतें व बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया। सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत के आदेश पर 14 मई से 16 मई तक हुई कमीशन की कार्यवाही में ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिलने का दावा किया गया।
'रंजिश में लिखवाया गया मुकदमा'
आरोपी जावेद अख्तर ने 17 मई को ज्ञानवापी प्रकरण को लेकर सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी की थी। वादी ने इसे हिंदू धर्म की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला बयान बताते हुए जैतपुरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मंगलवार को आरोपी के अधिवक्ता अनुज यादव व नरेश यादव ने अदालत में पक्ष रखा और कहा कि आरोपी के खिलाफ राजनीतिक विद्वेष के चलते मुकदमा दर्ज किया गया है।
दलील दी गयी कि वादी विवेक चंद जायसवाल भाजपा के पार्षद हैं और आरोपी भी पार्षद पद का प्रत्याशी था। इसी रंजिश में यह मुकदमा लिखवाया गया है।