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ज्ञानवापी मामला: दस्तावेजों को कोर्ट की पत्रावली में रखने की अनुमति, 17 अक्तूबर को होगी अगली सुनवाई

Mon, 05 Oct 2026 10:06 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Mon, 05 Oct 2026 10:06 PM IST
सार

वाराणसी में ज्ञानवापी मामले में विशेष न्यायाधीश द्वितीय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की अदालत में सुनवाई हुई। वहीं मामले की अगली सुनवाई 17 अक्तूबर को होगी।

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Gyanvapi case Permission granted to place documents on court record next hearing on October 17 in varanasi
Gyanvapi Case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विशेष न्यायाधीश द्वितीय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पूनम पाठक की अदालत में सोमवार को ज्ञानवापी के सबसे पुराने मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से दाखिल दस्तावेजों (फोटोस्टेट) को सुनवाई के लिए पत्रावली में शामिल करने की अनुमति दी है। मामले की अगली सुनवाई 17 अक्तूबर को होगी।

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पिछली तिथि पर वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने प्रकरण से जुड़े कुछ दस्तावेजों की छायाप्रति अदालत में दाखिल किया था। उनका अनुरोध था कि इसे अदालत की पत्रावली का हिस्सा बनाया जाए।
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इस प्रार्थना पत्र का मूल वादी दिवंगत हरिहर पांडेय की तीनों बेटियों के अधिवक्ता ने दलील दी थी कि छायाप्रति का कोई विधिक औचित्य और मान्यता नहीं है क्योंकि सुनवाई के लिए मूल पत्रावली अदालत के समक्ष उपलब्ध रहती है। अदालत ने इस प्रार्थना पत्र पर निर्णय सुरक्षित रखते हुए 5 अक्तूबर की तिथि तय की थी। अब दस्तावेजों को अदालत की पत्रावली में रखने की अनुमति मिल गई है।

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ये है मामला
पूरा मामला वर्ष 1991 के मूल मुकदमे में वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को उनके पद से हटाने से संबंधित है। मूल वादी हरिहर पांडेय के निधन के बाद उनकी बेटियां मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेणु पांडेय ने 6 अप्रैल 2024 को खुद को पक्षकार बनाने का आवेदन दिया था। इसके बाद 31 मई 2025 को उन्होंने वादमित्र रस्तोगी को हटाने के लिए एक अन्य प्रार्थना पत्र दाखिल किया। 

सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) भावना भारतीय की अदालत ने 11 जुलाई 2025 को वादमित्र को हटाने से संबंधित प्रार्थना पत्र को पोषणीय न मानते हुए निरस्त कर दिया था। निचली अदालत के इस आदेश के खिलाफ तीनों बहनों के अधिवक्ता ने जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका (रिवीजन पिटीशन) दायर की थी जो वर्तमान में विशेष न्यायाधीश द्वितीय की अदालत में लंबित है। 

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