Gyanvapi Case: ज्ञानवापी के मूल वाद को दूसरे कोर्ट में स्थानांतरण करने की अर्जी खारिज, जानें पूरा आदेश
Gyanvapi Case: ज्ञानवापी से जुड़े दो मामलों की सुनवाई आज कोर्ट में होनी है। इनमें एक 1991 से लंबित मूल वाद की अर्जी को खारिज कर दिया।
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Varanasi News: जिला जज जय प्रकाश तिवारी की कोर्ट ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) की अदालत में ज्ञानवापी के लंबित मुकदमे को अन्य अदालत में स्थानांतरित करने के लिए दाखिल स्व. हरिहर पांडेय की पुत्रियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा व रेणु पांडेय के प्रार्थना पत्र को सोमवार को खारिज कर दिया।
जिला जज की कोर्ट में बेटियों की ओर से अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव ने 21 मई को आवेदन दिया। आवेदन में कहा गया कि वर्ष 1991 के ज्ञानवापी के पुराने मामले सिविल जज (सीडि) द्रुतगामी न्यायालय वाराणसी के न्यायालय में विचाराधीन है। उक्त वाद में 20 मई को सुनवाई के दौरान विपक्षीगण ने बेटियों के पक्षकार बनने संबंधित अर्जी पर संपूर्ण बहस करने नहीं दी जा रही है।
न्यायालय पर दबाव बनाया जा रहा है कि जल्द से जल्द येन-केन प्रकारेण प्रार्थीगण की प्रार्थना पत्र पर पूरे तथ्य को न्यायालय के संज्ञान में लाये जाने और वास्तविक तथ्यों को उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ तर्कपूर्ण तथ्यों के साथ बहस के जरिए रखे जाने और बहस को शीघ्रातिशीघ्र समाप्त किया जाए।
अदालत में पक्ष रखने के लिए उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है। इस पर वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने प्रार्थना पत्र की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए इसे निरस्त करने की मांग की। यह भी दलील दी कि कई तिथियों पर पुत्रियों की ओर से पक्ष रखा जा चुका है।
कोर्ट ने बेटियों की अर्जी खारिज कर दी। पक्षकार बनने संबंधित लंबित सिविल जज सीनियर डिविजन (एफटीसी) की अदालत में अब 11 जुलाई की तिथि नियत की है। इसमें वादमित्र की ओर से बेटियों की ओर से वादमित्र से हटाने की अर्जी पर आपत्ति दाखिल की गई है।
ज्ञानवापी के अन्य मामले में अब एक सितंबर को होगी सुनवाई
सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक की अदालत में सोमवार को ज्ञानवापी संबंधित एक अन्य मामले में सुनवाई टल गई। कोर्ट ने इस मामले अगली सुनवाई एक सितंबर की तिथि नियत की है। विष्णु गुप्ता आदि ने कोर्ट में वाद दाखिल कर कहा है कि ज्ञानवापी में गैर हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित किया जाए।