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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Gyanvapi Case: In the third report of the commission, the reality of first report on Gyanvapi came again, temple was also confirmed 26 years ago

Gyanvapi Case : कमीशन की तीसरी रिपोर्ट में ज्ञानवापी की पहली वाली ही हकीकत, 26 साल पहले मंदिर की भी हुई थी पुष्टि

Fri, 20 May 2022 02:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 20 May 2022 02:23 AM IST
सार

26 साल पहले न्यायालय में दाखिल कमीशन की रिपोर्ट में प्राचीन मंदिर के भग्नावशेष का दावा किया गया था। बुधवार को विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह की ओर से दाखिल रिपोर्ट में भी पहली रिपोर्ट वाली ही हकीकत को साफ तौर पर दोहराया गया है। इसके साथ ही बुधवार को हटाए गए अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्र ने अपनी आंशिक रिपोर्ट में कई दावे किए हैं। 
 

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Gyanvapi Case: In the third report of the commission, the reality of first report on Gyanvapi came again, temple was also confirmed 26 years ago
ज्ञानवापी सर्वे की रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत के आदेश पर पूरी हुई कमीशन की कार्यवाही की रिपोर्ट में 26 साल पहले वाली हकीकत ही सामने आई है। आजादी के बाद से चल रहे ज्ञानवापी विवाद में यह तीसरी बार कमीशन की कार्यवाही पूरी हुई है। 

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26 साल पहले न्यायालय में दाखिल कमीशन की रिपोर्ट में प्राचीन मंदिर के भग्नावशेष का दावा किया गया था। बुधवार को विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह की ओर से दाखिल रिपोर्ट में भी पहली रिपोर्ट वाली ही हकीकत को साफ तौर पर दोहराया गया है। इसके साथ ही बुधवार को हटाए गए अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्र ने अपनी आंशिक रिपोर्ट में कई दावे किए हैं। 
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ज्ञानवापी परिसर में चल रहे विवाद में 26 साल पहले सिविल जज की अदालत में दर्ज एंसिएंट आइडल स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर व अन्य के वाद में पहली बार कमीशन की कार्यवाही का आदेश हुआ था। उस वक्त भी विशेष अधिवक्ता आयुक्त राजेश्वर प्रसाद सिंह ने हिंदू मंदिरों के भग्नावशेष मिलने का दावा किया था। इसके बाद राखी सिंह बनाम सरकार के वाद में सिविल जज सीनियर डिवीजन के आदेश पर छह व सात मई 2022 को कमीशन की कार्यवाही की रिपोर्ट तत्कालीन अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्र ने जमा की है। 

उन्होंने भी बैरिकेड के बाहर मंदिर के साक्ष्य का दावा किया है और अंदर दिखने के आधार पर कई बातों का जिक्र रिपोर्ट में किया है। कमीशन की कार्यवाही के बाद न्यायालय के आदेश पर सबकी निगाहें टिकी हैं। फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय की रोक के बाद अब 23 मई को होने वाली सुनवाई को अहम माना जा रहा है।

पुरातात्विक सर्वेक्षण से ही सच आएगा सामने

सेंट्रल बार के पूर्व अध्यक्ष विवेक शंकर तिवारी का कहना है कि कमीशन की कार्यवाही पूरी होने और रिपोर्ट दाखिल होने के बाद सभी न्यायालय के आदेश के इंतजार में हैं। इस विवाद में अब तक आई कमीशन रिपोर्ट को मानें तो पुरातात्विक सर्वेक्षण बेहद जरूरी है। वजूखाने में मिले शिवलिंग की स्थिति स्पष्ट करने के लिए जांच को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। सर्वे रिपोर्ट की स्पष्ट आख्या कोर्ट मंगवाए।

तारकेश्वर महादेव का है वजूखाने में मिला शिवलिंग 

प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वर के वादमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी का दावा है कि वजूखाने में मिला शिवलिंग तारकेश्वर महादेव का है। उन्होंने कहा कि पुरातात्विक सर्वेक्षण से ही सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी परिक्षेत्र के पुरातात्विक सर्वेक्षण संबंधी अपील के दौरान अदालत में उन्होंने सारे साक्ष्य प्रस्तुत किए थे।



उन्होंने बताया कि इतिहासकार डॉ. एएस अल्तेकर ने किताब हिस्ट्री ऑफ बनारस में ज्ञानवापी के मौजूदा वजूखाना की जगह तारकेश्वर लिखा था। इसलिए यह साफ है कि वजूखाने में मिला शिवलिंग तारकेश्वर महादेव का है। जेम्स प्रिंसेप के नक्शे में भी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र को लेकर वजूखाने की जगह तारकेश्वर मंदिर दर्शाया गया था।  

कहा कि बनारस आए ईस्ट इंडिया कंपनी के जेम्स प्रिंसेप और इतिहासकार डॉ. एएस अल्तेकर के नक्शे में मस्जिद के वजूखाने की जगह तारकेश्वर महादेव के मंदिर लिखा गया है। उन्होंने इसकी सही जानकारी के लिए रडार तकनीक से पुरातात्विक सर्वेक्षण की अदालत से मांग की है। उम्मीद है कि जल्द ही अदालत की ओर से इसका आदेश दिया जाएगा। 

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