Gyanvapi Case: अखिलेश यादव और ओवैसी पर मुकदमा दर्ज होगा या नहीं, अब कल आएगा कोर्ट का आदेश
ज्ञानवापी प्रकरण में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और सांसद सांसद अससुद्दीन ओवैसी समेत अन्य नेताओं की आपत्तिजनक बयानबाजी मामले में कोर्ट का आदेश मंगलवार को आ सकता है।
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ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग के पास गंदगी फैलाने और उस पर बयानबाजी कर धार्मिक भावना भड़काने, नारेबाजी के मामला सुनवाई योग्य है या नहीं इसपर सोमवार को एसीजेएम पंचम की अदालत में आदेश नहीं आ सका। कोर्ट ने आदेश के लिए 18 अक्तूबर की तिथि निर्धारित की। इसमें अखिलेश यादव, सांसद अससुद्दीन ओवैसी समेत शहर काजी और मौलवी पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है।
इससे पहले शनिवार को ही आदेश आने वाला था लेकिन किसी कारण नहीं आ सका था। वाराणसी के रामेश्वर निवासी अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय की ओर से दाखिल वाद में मुकदमा सुनने योग्य है या नहीं, इस पर सुनवाई पूरी हो चुकी है।
उन्होंने ज्ञानवापी में वजू स्थल के पास मिले कथित शिवलिंग के पास गंदगी फैलाने और शिवलिंग को लेकर बयानबाजी कर धार्मिक भावना भड़काने, नारेबाजी के मामले में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और एआईएमआईएम चीफ असुद्दीन ओवैसी समेत शहर काजी और मौलवी पर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
पक्षकार बनाने के आवेदन पर हुई सुनवाई
ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी प्रकरण की सुनवाई जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में हुई। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सर्वे के दौरान सामने आए कथित शिवलिंग की आकृति की कार्बन डेटिंग कराने संबंधी मांग खारिज करते हुए पक्षकार बनाने संबंधित अर्जियों पर सुनवाई शुरू की थी। सोमवार को भी उन पर सुनवाई हुई।
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी व सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि कोर्ट ने हमारी मांग मान ली है। जिसमें वादी पक्ष की सहमति के बगैर पक्षकार बनाये जाने का विरोध किया गया था। कुल 16 लोगों ने पक्षकार बनने के लिए आवेदन दिया था।
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जिसमें से पांच लोगों का आवेदन जिला जज ने खारिज कर दिया। तीन लोगों के आवेदन पर सोमवार को सुनवाई पूरी हुई। मामले में आदेश के लिए 21 अक्तूबर की तिथि अदालत ने तय की। 8 लोगों का आवेदन अनुपस्थित रहने के कारण पहले ही खारिज हो गया था।
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अदालत ने 18 अक्तूबर को सभी पक्षों को अपनी लिखित बहस दाखिल करने को कहा है। अदालत में किरन सिंह की तरफ से मानबहादुर सिंह, शिवम गौड़ और अनुपम द्विवेदी ने दलीलें पेश कीं। वरिष्ठ अधिवक्ता मानबहादुर सिंह ने कहा कि वाद सुनवाई योग्य है या नहीं, इस मुद्दे पर अंजुमन इंतजामिया की तरफ से जो भी मुद्दा उठाया गया है, वह साक्ष्य व ट्रायल का विषय है।