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दावा: ज्ञानवापी में गुंबद के नीचे 100 फीट का शिवलिंग, हो एएसआई सर्वे; अब अगली सुनवाई 11 सितंबर को
Sat, 07 Sep 2024 10:20 AM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Sat, 07 Sep 2024 10:20 AM IST
सार
लॉर्ड विश्वेश्वर मूलवाद में ज्ञानवापी के बचे हुए अन्य हिस्सों पर एएसआई से सर्वे कराने के मुद्दे पर सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष का दावा है कि ज्ञानवापी में गुंबद के नीचे 100 फीट का शिवलिंग है, इसका एएसआई सर्वे हो। मामले में अब अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सिविल जज सीनियर डिवीजन (फास्ट ट्रैक कोर्ट) युघूल शंभू की अदालत में शुक्रवार को ज्ञानवापी से जुड़े वर्ष 1991 के लॉर्ड विश्वेश्वर मूलवाद में ज्ञानवापी के बचे हुए अन्य हिस्सों पर एएसआई से सर्वे कराने के मुद्दे पर सुनवाई हुई। वाद मित्र ने बहस जारी रखते हुए अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
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कोर्ट में लॉर्ड विश्वेश्वर के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से दावा किया गया कि ज्ञानवापी परिसर में मुख्य गुंबद के नीचे 100 फीट शिवलिंग के साथ इतनी गहराई वाला एक अरघा भी है। जो शिवलिंग स्वयंभू अति प्राचीन आदि विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग है। पास में एक विशाल कुंआ भी है, जो ठोस मलबा से पटा है। कुंआ से अब भी जलस्राव होता है।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सर्वे रिपोर्ट में भी कुंआ का जिक्र किया गया है, जिसमें लिखा गया है कि मलबा की वजह से पूरी जानकारी सामने नहीं आ पाई। उन्होंने ज्ञानवापी के पूरे परिसर के एएसआई सर्वे की अर्जी के समर्थन में दलीलें रखीं।
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पुरानी इतिहासकार द्वारा रचित पुस्तक का हवाला देते हुए कोर्ट को यह भी बताया कि मंदिर के तोड़ने से पूर्व अरघा में इकट्ठा पानी निकलने के लिए ब्रह्मनाल व मणिकर्णिका होते हुए नाली भी बनी थी, जो गंगा में मिलती थी। समय के साथ अब उसका अस्तित्व नहीं है। इसके पहले एक और ने पक्षकार बनाने के लिए अर्जी दी।
बहस के पहले ही इस मामले के वादी रहे मृतक सोमनाथ व्यास के भतीजे योगेंद्र नाथ व्यास ने पिछले तिथि पर पक्षकार बनाने के लिए अर्जी दी थी। उस पर योगेंद्र व्यास के अधिवक्ता ने इस अर्जी पर पहले सुनने की अनुरोध करने लगे। जिस पर अंजुमन की ओर से भी सुनने के कोर्ट समर्थन किया गया। मूल वाद के वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने इसका विरोध किया। इसको लेकर वादमित्र और योगेंद्र व्यास के अधिवक्ता से जिच भी हुई। कोर्ट ने बाद में वाद मित्र की सर्वे संबंधित अर्जी पर सुनवाई की।