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ज्ञानवापी मामला: प्रशासन ने रुचि ली होती तो हो गई होती कमीशन की कार्यवाही, कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, कहा- अहंकार या घमंड में प्रशासन के अधिकारी

Thu, 12 May 2022 10:37 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 12 May 2022 10:37 PM IST
सार

ज्ञानवापी मामले में सर्वे के दौरान जिला प्रशासन के रुचि नहीं लेने के वादी पक्ष के आरोप पर सिविल जल सीनियर डिवीजन की अदालत ने जिला प्रशासन व अधिकारियों पर तल्ख टिप्पणी की।

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Gyanvapi campus case: The officers do not consider it proper to comply with the orders of the court due to arrogant remarks, arrogance or arrogance of the court.
ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी मामले में सर्वे के दौरान जिला प्रशासन के रुचि नहीं लेने के वादी पक्ष के आरोप पर सिविल जल सीनियर डिवीजन की अदालत ने जिला प्रशासन व अधिकारियों पर तल्ख टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि वादिनी गण ने अपने 41 पेज के वाद में तथ्यों का हवाला देकर कमीशन की कार्यवाही की मांग की थी। 

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इसकी भाषा सुस्पष्ट थी, मगर यह समझ से परे है कि जिला प्रशासन को इतनी स्पष्ट भाषा क्यों नही समझ में आई। कोर्ट ने कहा कि जिला प्रशासन ने कमीशन की कार्यवाही में रुचि ली होती तो कमीशन की कार्यवाही अब तक हो गई होती।
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अदालत ने कहा कि प्राय: यह देखने को मिलता है कि जिला प्रशासन के अधिकारी अपने अहंकार अथवा घमंड में रहने के कारण कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराना उचित नहीं समझते हैं। हाईकोर्ट के आदेश का भी ये अनुपालन नहीं करते, जब तक अवमानना या एनबीडब्ल्यू के जरिये तलब नहीं किये जाते।

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Gyanvapi campus case: The officers do not consider it proper to comply with the orders of the court due to arrogant remarks, arrogance or arrogance of the court.
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

कोर्ट ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट लोकतंत्र का सजग प्रहरी रहा है। लोकतंत्र की रक्षा के लिए पीएम का इलेक्शन रद्द किया और एक मुख्यमंत्री को प्रतिस्थापित किया। जिला प्रशासन के अधिकारी सही बातों को मुख्यमंत्री व शासन के समक्ष नहीं रखते, बल्कि व्यक्तिगत हितों के मद्देनजर अपना पक्ष रखते हैं।

कोर्ट ने कहा कि एक आम आदमी को शायद ही जानकारी हो कि अधिकारी अपने घमंड और अहंकार के कारण कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करते हैं। जब इन अफसरों पर अर्थदंड लगता है और मामला सुप्रीम कोर्ट जाता है तब बड़ी मात्रा में सरकार का धन व्यय होता है, जो देश की जनता से कर के रूप में लिया जाता है यानि आम जनता के धन का दुरुपयोग है।
 

कमीशन की कार्यवाही में बाधा पर होगी एफआईआर

Gyanvapi campus case: The officers do not consider it proper to comply with the orders of the court due to arrogant remarks, arrogance or arrogance of the court.
कोर्ट का फैसला - फोटो : amar ujala

अदालत ने स्पष्ट आदेश में कहा कि कमीशन की कार्यवाही में किसी के द्वारा कोई अवरोध उत्पन्न किया जाता है, तब जिला प्रशासन प्राथमिकी दर्ज करवाकर सख्त विधिक कार्यवाही करें। किसी भी दशा में कमीशन की कार्यवाही रोकी नहीं जाएगी, चाहे किसी पक्षकार द्वारा सहयोग किया जाए या नहीं। वाद लिपिक को कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को आदेश की प्रति भेजने का आदेश दिया। अधिवक्ता आयुक्त 17 मई तक कमीशन रिपोर्ट कोर्ट में देंगे और कमीशन रिपोर्ट पर उसी दिन सुनवाई होगी।

अधिवक्ता आयुक्त पूरे परिसर की फोटो व वीडियोग्राफी के लिए स्वतंत्र
ज्ञानवापी मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने आदेश में स्पष्ट कहा कि अधिवक्ता आयुक्त पक्षकारों द्वारा बताए गए बिंदुओं पर फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी के लिए स्वतंत्र होंगे। अदालत ने यह भी कहा है कि किसी अधिवक्ता आयुक्त की गैर मौजूदगी के चलते भी सर्वे का काम नहीं रुकेगा। 

अदालत ने सर्वे कमिश्नर को हटाये जाने की मांग को खारिज करते हुए जारी आदेश में कहा है कि कमीशन की कार्यवाही सामान्य कमीशन है, जो अधिकतर सिविल वादों में कराई जाती है और शायद ही अधिवक्ता आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाया जाता है।

Gyanvapi campus case: The officers do not consider it proper to comply with the orders of the court due to arrogant remarks, arrogance or arrogance of the court.
ज्ञानवापी मस्जिद, काशी विश्वनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

अदालत ने कहा कि इस मामले में अधिवक्ता आयुक्त पर अंगुली उठाया जाना न्यायोचित नहीं है। अंजुमन इंतजामिया के आवेदन में बल नहीं है, फिर भी न्याय होना ही नहीं चाहिए वरन न्याय होता दिखना भी चाहिए। इस क्रम में अधिवक्ता कमिश्नर के साथ विशेष अधिवक्ता कमिश्नर और सहायक कमिश्नर नियुक्त किये जाते हैं। अदालत ने सर्वे रुकवाने वाले प्रकरण में सात और अधिवक्ता आयुक्त को हटाए जाने के मामले में तीन पन्नों का फैसला सुनाया। 

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