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Gyanvapi ASI Survey: ज्ञानवापी मंदिर या मस्जिद? सर्वे से होगा 354 वर्षों के विवाद का समाधान; जानें सबकुछ

Fri, 04 Aug 2023 12:30 PM IST
उत्पल कांत पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 04 Aug 2023 12:30 PM IST
सार

Gyanvapi Survey: ज्ञानवापी में सर्वे के मद्देनजर जिले की पुलिस और प्रशासनिक महकमा हाई अलर्ट पर है। एएसआई को सर्वे कर बताना है कि क्या मंदिर को ध्वस्त कर उसके ढांचा के ऊपर मस्जिद बनाई गई है?

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Gyanvapi ASI survey will resolve 354 years old dispute which is temple or masjid
ज्ञानवापी परिसर। - फोटो : social media

विस्तार

वाराणसी के ज्ञानवापी स्थित सील वजूखाने को छोड़कर शेष अन्य हिस्से का सर्वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम कर रही है। ज्ञानवापी में एएसआई की टीम बिना मशीनों के प्रयोग से ही पूरे परिसर का नक्शा शीट पर उतार रही है। एएसआई सर्वे से ज्ञानवापी को लेकर 354 वर्षों से चल रहे विवाद के समाधान की उम्मीद जगी है।

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हिंदू पक्ष का दावा है कि औरंगजेब ने 1669 में मंदिर ध्वस्त कराया और उसके ढांचे को बदल दिया। तभी हिंदू अपना अधिकार पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब कानूनी तरीके से अधिकार पाने के प्रयास में लगे हैं। वहीं, मुस्लिम पक्ष को इस दावे पर आपत्ति है। उसका कहना है कि ज्ञानवापी परिसर में 600 वर्षों से नमाज अदा की जा रही है।
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ज्ञानवापी परिसर के एएसआई से सर्वे का वाद जिला अदालत में दाखिल करने वाले सीता साहू, रेखा पाठक, लक्ष्मी देवी और अंजू व्यास ने तमाम दावे किए हैं। शपथ पत्र दाखिल करके अदालत को बताया है कि उत्तरवाहिनी गंगा के किनारे स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान आदि विश्वेश्वर का मंदिर है।

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एएसआई सर्वे से ही समाधान संभव

इसे मुगल शासक औरंगजेब के फरमान से वर्ष 1669 में ध्वस्त किया गया था। इसके खिलाफ काशी और देश के अन्य हिस्सों में हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों ने आवाज उठानी शुरू कर दी थी। मांग थी कि द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक भगवान आदि विश्वेश्वर का मंदिर पुन: मूल स्वरूप में स्थापित किया जाए। यह विवाद 354 वर्षों से चल रहा है। एएसआई सर्वे से ही समाधान संभव है।

मुस्लिम पक्ष का दावा- औरंगजेब ने कोई मंदिर नहीं तुड़वाया था

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ज्ञानवापी के पिछले हिस्से की दीवार, जिस पर हिंदू धर्म से जुड़े निशान मिलने के दावे - फोटो : सोशल मीडिया

इन दावों पर मुस्लिम पक्ष की तरफ से अंजुमन इंतेजामिया कमेटी ने सवाल उठाए और अदालत में आपत्ति भी दाखिल की। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि हिंदू पक्ष का दावा ठीक नहीं है। औरंगजेब ने कोई मंदिर नहीं तुड़वाया था। हिंदू पक्ष दावा कर रहा है, लेकिन साक्ष्य नहीं दे रहा। ज्ञानवापी में लंबे समय से नमाज पढ़ी जा रही है। बहरहाल, दावे और आपत्ति के बीच जिला जज की अदालत ने एएसआई को सर्वे का आदेश दिए थे।

अब हाईकोर्ट ने भी सर्वे पर मुहर लगा दी है। ऐसे में विवाद के समाधान की उम्मीद जगी है। हिंदू पक्ष का कहना है कि एएसआई के सर्वे में जो कुछ आएगा, उसे मानकर आगे बढ़ा जाएगा। हालांकि, मुस्लिम पक्ष अब भी सर्वे के पक्ष में नहीं है। अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने सर्वे रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

एएसआई की सर्वे रिपोर्ट से ही तो अयोध्या विवाद का अंत हुआ था

हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि के विवाद का अंत एएसआई की सर्वे रिपोर्ट से ही हुआ था। रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार करके आदेश सुनाया था। मुस्लिम पक्ष को सहयोग की भावना के साथ आगे आना चाहिए। 354 वर्ष से चल रहे विवाद के समाधान के लिए वैज्ञानिक पद्धति से हो रहे सर्वे में मसाजिद कमेटी को सहयोग करना चाहिए। वैज्ञानिक पद्धति से सर्वे में जो तथ्य सामने आएं, उसका हम भी स्वागत करेंगे और उन्हें भी करना चाहिए।

सर्वे में सब कुछ साफ करने को कहा गया

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ज्ञानवापी परिसर के बाहर सर्वेक्षण टीम - फोटो : अमर उजाला

जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने ज्ञानवापी परिसर की संरचना को नुकसान पहुंचाएं बगैर ही सब कुछ वैज्ञानिक तरीके से एएसआई को स्पष्ट करने के लिए कहा था। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सील वजूखाने को छोड़कर ज्ञानवापी के मौजूदा निर्माण की प्रकृति और आयु का निर्धारण करें। इमारत के अलग-अलग हिस्सों और संरचना के नीचे मौजूद ऐतिहासिक और धार्मिक कलाकृतियों व अन्य सामग्रियों को देख कर उनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें। जो भी कलाकृतियां दिखें, उनकी भी उम्र और प्रकृति के बारे में बताएं। अदालत ने कहा है कि एएसआई की रिपोर्ट में यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या मंदिर को ध्वस्त कर उसके ढांचे के ऊपर मस्जिद बनाई गई है।

16 मई 2022 को सील किया गया था वजूखाना

ज्ञानवापी में अधिवक्ता आयुक्त के कमीशन की कार्रवाई के दौरान 16 मई 2022 को वजूखाने में शिवलिंग मिलने का दावा हिंदू पक्ष ने किया था। वहीं, मसाजिद कमेटी का कहना था कि वह पुराना फव्वारा है। हिंदू पक्ष के आवेदन पर 16 मई 2022 को जिला अदालत ने वजूखाने को सील करने का आदेश दिया था। उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।

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