गुरुग्राम सामूहिक हत्याकांड : वैज्ञानिक श्रीप्रकाश और उनकी पत्नी ने बीएचयू से की थी पीएचडी
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दिल्ली से सटे गुरुग्राम में सोमवार (1 जुलाई) को एक वैज्ञानिक ने अपनी पत्नी और दो बच्चों की हत्या कर के आत्महत्या कर ली थी। वैज्ञानिक डॉ. श्रीप्रकाश सिंह वाराणसी के रहने वाले थे। डॉ. श्रीप्रकाश सिंह ने 1995 में बीएचयू के रसायन विज्ञान विभाग से एनालिटिकल केमिस्ट्री में पीएचडी की थी।
रसायन विज्ञान विभाग के कर्मचारियों के अनुसार श्रीप्रकाश की पत्नी सोनू ने भी उनके साथ पीएचडी की थी। पढ़ाई करने के बाद दोनों ने प्रेम विवाह किया और बनारस छोड़ कर लखनऊ चले गए। इसके बाद दोनों कहां गए, इस बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है।
बाबतपुर क्षेत्र के रघुनाथपुर गांव के मूल निवासी डॉ. श्रीप्रकाश और सोनू ने बीएचयू के रसायन विज्ञान विभाग से 1991 में एमएससी की पढ़ाई की थी। हालांकि, एमएससी के बाद श्रीप्रकाश और सोनू ने किन प्रोफेसरों के मार्गदर्शन में पीएचडी की उपाधि ग्रहण की, इस संबंध में विभाग के प्रोफेसर और कर्मचारी भी कुछ बता नहीं सके।
श्रीप्रकाश और उनके परिवार के साथ हुई घटना के बारे में जान कर रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर स्तब्ध नजर आए। वहीं, रघुनाथपुर के ग्रामीण भी श्रीप्रकाश के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सके।
गांव के कुछेक बुजुर्गों के अनुसार श्रीप्रकाश ने अपनी पैतृक संपत्ति लगभग 25 साल पहले बेच दी थी। उनके पिता की मौत हो गई थी और उनकी मां उनके साथ ही रहती थी। वर्षों से वह गांव नहीं आए थे, इस वजह से उनके बारे में किसी को कोई खास जानकारी नहीं है।
ये था पूरा मामला
गुरुग्राम के सेक्टर-49 स्थित उप्पल साउथ एंड एस ब्लॉक के फ्लैट नंबर 299 में डॉ. श्रीप्रकाश सिंह (55) अपने परिवार के साथ रहते थे। उनके परिवार में पत्नी सोनू सिंह (50), बेटी अदिति (22) और बेटा आदित्य (13) थे। उन्होंने रविवार देर रात धारदार हथियार से पहले परिवार के तीनों सदस्यों को मौत के घाट उतारा और फिर खुद फांसी पर झूल गए।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार डॉ. प्रकाश मूलरूप से वाराणसी के रहने वाले थे। घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें लिखा था, "मैं अपने परिवार को संभाल नहीं पा रहा था।"