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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Guru Purnima Manohar sport of wrestling alive honored managing Guru Gaya Seth Akhara since 1976

Guru Purnima: कुश्ती को जीवंत रखने वाले मनोहर का सम्मान, 1976 से संभाल रहे गुरु गया सेठ अखाड़ा; जुटे लोग

Wed, 29 Jul 2026 09:52 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 29 Jul 2026 09:52 PM IST
सार

Varanasi News: गुरु पूर्णिमा पर कज्जाकपुरा स्थित गुरु गया सेठ अखाड़े में मुख्य संरक्षक एवं अंतरराष्ट्रीय पहलवान मनोहर सिंह यादव का सम्मान किया गया। 1976 से अखाड़े की देखरेख कर रहे मनोहर यादव वर्षों से पारंपरिक मल्लविद्या को बढ़ावा दे रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में कई पहलवान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल कर चुके हैं।

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Guru Purnima Manohar sport of wrestling alive honored managing Guru Gaya Seth Akhara since 1976
1976 से मनोहर सिंह यादव संभाल रहे गुरु गया सेठ अखाड़ा। - फोटो : संवाद

विस्तार

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कज्जाकपुरा स्थित गुरु गया सेठ अखाड़े में श्रद्धा और सम्मान का अनूठा आयोजन हुआ। अखाड़े के मुख्य संरक्षक एवं अंतरराष्ट्रीय पहलवान मनोहर सिंह यादव का उनके शिष्यों ने माल्यार्पण और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया। इस दौरान शिष्यों ने उनका आशीर्वाद लेकर गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन किया।

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मनोहर सिंह यादव पिछले कई दशकों से काशी की पारंपरिक मल्लविद्या को जीवंत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वर्ष 1976 से वे अखाड़े की देखरेख कर रहे हैं। उन्होंने काशी की मिट्टी की कुश्ती की परंपरा को संरक्षित करने के उद्देश्य से वर्ष 1978 में गुरु गया सेठ अखाड़े के पुनरुद्धार का बीड़ा उठाया। इसके बाद भारतीय रेलवे में लंबी सेवा देने के उपरांत वर्ष 2014 में सेवानिवृत्त होने पर उन्होंने अपना पूरा समय अखाड़े और युवा पहलवानों के प्रशिक्षण को समर्पित कर दिया।

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उनकी देखरेख में आज भी अखाड़े में पारंपरिक मिट्टी की कुश्ती के दांव-पेंच सिखाए जाते हैं। यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके अनेक पहलवान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर काशी और देश का नाम रोशन कर चुके हैं। अखाड़ा आज भी नई पीढ़ी के पहलवानों को तैयार करने का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।

मनोहर सिंह यादव का कहना है कि आधुनिक दौर में भी काशी की प्राचीन मल्लविद्या और अखाड़ा संस्कृति को जीवित रखना जरूरी है। उनका मानना है कि पारंपरिक खेल युवाओं को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ अनुशासन और संस्कार भी प्रदान करते हैं। आज भी अखाड़े में सुबह और शाम बड़ी संख्या में युवा मिट्टी को प्रणाम कर अभ्यास करते हैं, जो काशी में कुश्ती के प्रति आज भी बने उत्साह का प्रमाण है।

सम्मान समारोह में अंतरराष्ट्रीय पहलवान जमुना सिंह यादव, दिनेश पांडेय, चंदन सिंह यादव, बच्चेलाल यादव, राजेश यादव सहित बड़ी संख्या में पहलवान, शिष्य और खेल प्रेमी मौजूद रहे। सभी ने गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की।

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