गुरु पूर्णिमा: कबीरचौरा से अघोर पीठ तक गुरु चरणों में उमड़ेगा देश-विदेश का सैलाब; लाखों शिष्यों का होगा स्वागत
Guru Purnima: गुरु पूर्णिमा पर कबीरचौरा से अघोर पीठ तक देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और शिष्यों के स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विभिन्न आश्रमों और मठों में गुरु पूजन, दर्शन और आशीर्वाद के कार्यक्रम होंगे। पर्व पर काशी की साझा सांस्कृतिक विरासत, आस्था और गुरु-शिष्य परंपरा की अनूठी छटा देखने को मिलेगी।
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Varanasi News: शिव की नगरी में गुरु पूर्णिमा का पर्व हमेशा से बेहद खास और आस्था से सराबोर रहा है। इस बार गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 29 जुलाई, बुधवार को पड़ रही है। इस दिन काशी के सभी प्रमुख मठों, मंदिरों और आश्रमों में देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और शिष्यों का जमावड़ा लगेगा। शास्त्रों के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा को 'व्यास पूर्णिमा' भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन वेदों के संकलनकर्ता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था।
ज्योतिषियों के मुताबिक, सनातन परंपरा में गुरु को साक्षात ईश्वर का रूप माना गया है। इसीलिए इस दिन सुबह 05:41 से 09:05 बजे के शुभ मुहूर्त में गुरु वंदना, चरण पूजन और महाआरती का विशेष आयोजन किया जाएगा। काशी के मठ-मंदिरों में गुरु पूर्णिमा के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं।
जयोतिषाचार्यों का कहना है कि 28 जुलाई की शाम 6:18 बजे से ही पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी, इसलिए आश्रमों में श्रद्धालुओं का आगमन एक दिन पहले से ही शुरू होने की उम्मीद है। दूर-दराज रहने वाले शिष्य अभी से ही फोन और सोशल मीडिया के जरिए स्थानीय शिष्यों से संपर्क साधकर गुरुओं का कुशलक्षेम पूछ रहे हैं और अपने आने की व्यवस्था तय कर रहे हैं। सभी मठों और आश्रमों में श्रद्धालुओं के आवभगत और ठहरने के लिए बड़े पैमाने पर साफ-सफाई, रंग-रोगन और टेंट-पंडाल लगाने का काम तेजी से जारी है।
अघोर पीठ (बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुंड) : अघोर संप्रदाय के इस विश्व प्रसिद्ध केंद्र में देश-विदेश से अघोर पंथ के अनुयायी जुटेंगे, जहां विशेष तांत्रिक और आध्यात्मिक गुरु-पूजन होगा।
श्री विद्यामठ और शंकराचार्य मठ : यहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती समेत अन्य संतों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार और गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु... के जाप के साथ पारंपरिक पादुका पूजन किया जाएगा।
कबीरचौरा मठ : संत कबीर दास की कर्मभूमि रहे इस मठ में निर्गुण परंपरा के संत और कबीरपंथी अनुयायी गुरु वाणी का पाठ और कबीर भजनों के जरिए गुरु को नमन करेंगे।
गढ़वाघाट आश्रम : इस पीठ पर यादव समाज समेत समाज के सभी वर्गों के लाखों भक्तों की गहरी आस्था है। यहां गुरु पूर्णिमा पर विशाल भंडारे और दीक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
स्वामी नारायण मंदिर : यहां भी भक्ति भाव के साथ विशेष सत्संग, कीर्तन और गुरु देव के स्वागत की भव्य तैयारियां चल रही हैं।
पातालपुरी मठ : यहां मुस्लिम महिलाएं गुरु बालक दास महाराज के दर्शन के लिए आती हैं। वह प्रभु श्रीराम की आरती भी उतारेंगी।
बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रो. सुभाष पांडेय ने बताया कि विधि और शास्त्र पूर्वक पूजन और दान पुण्य करने से जीवन में समृद्धि और शांति बनी रहती है। अध्यात्मिक दृष्टि से अच्छा होता ही है, साथ ही ग्रहों के शुभ प्रभाव को भी बढ़ाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद सबसे पहले अपने माता-पिता और गुरुओं के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। घर में सत्यनारायण भगवान की कथा या विष्णु पूजा करना अत्यधिक शुभ फल देता है।