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आषाढ़ महीने में आठ दिन के ही होंगे गुप्त नवरात्र

Thu, 08 Jul 2021 11:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jul 2021 11:57 PM IST
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Gupt Navratri will be of eight days in the month of Ashadh
आषाढ़ महीने में शक्ति की आराधना का पर्व गुप्त नवरात्र 11 जुलाई से आरंभ हो रहा है। इस बार नवरात्र में तिथि का क्षय हो रहा है। जिससे ये नौ की बजाय आठ ही दिन के रहेंगे। गुप्त नवरात्र में देवी की विशेष मंत्रों से आराधना करने पर विशेष फल मिलता है। गुप्त नवरात्र की शुरुआत रवि पुष्य नक्षत्र और राजयोग के साथ सर्वार्थसिद्धि योग में होगी। साथ ही भड़ली नवमी के मुहूर्त पर ही नवरात्र 18 जुलाई को रवियोग में संपन्न होंगे।
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ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र ने बताया कि 11 जुलाई को प्रतिपदा तिथि में देवी की साधना शुरू होगी। इसके अगले दिन यानी 12 को द्वितीया, 13 को चतुर्थी, 14 को पंचमी, 15 को षष्ठी तिथि का क्षय हो जाएगा। इसके बाद 16 को सप्तमी, 17 को अष्टमी और 18 को नवमी तिथि की पूजा के साथ ही रवियोग में नवरात्र संपन्न हो जाएंगे। इन दिनों में देवी की पूजा दश महाविद्याओं के रूप में की जाएगी।
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हवन में औषधीयों के इस्तेमाल से रुकेगा संक्रमण
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि गुप्त नवरात्र में व्रत रखकर दश महाविद्याओं के अलावा देवी दुर्गा और काली की आराधना भी की जाती है। देवी के बीज मंत्र और सप्तशती पाठ के साथ हवनयज्ञ किया जाए तो वातावरण तो शुद्ध होगा ही, साधकों के मन में सकारात्मकता भी बढ़ेगी। आषाढ़ महीने में जब बारिश का मौसम रहेगा तब इस दौरान तमाम तरह के संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। इसलिए इनसे बचने के लिए हवन के लिए औषधीय जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करना चाहिए।
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साल में होते हैं चार नवरात्र
पं. मिश्र ने बताया कि साल में चार नवरात्र में से दो प्रकट और दो गुप्त नवरात्र आते हैं। प्रकट नवरात्र चैत्र और आश्विन माह में आते हैं जबकि गुप्त नवरात्र माघ और आषाढ़ माह में। गुप्त नवरात्र में साधक मंत्र-तंत्र साधना के लिए विशेष उत्साहित रहते हैं। देवी के बीज मंत्रों का जाप कर अपनी साधना की सिद्धि करते हैं। गुप्त नवरात्र में पूजा का फल जल्दी और दोगुना मिलता है। इन दिनों में मां जल्दी प्रसन्न होती हैं और भक्तों को मनोवांछित फल देती हैं। इस दौरान मां की पूजा में शामिल होने वाली सामग्री का भी एक विशेष महत्व माना जाता है।
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