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गुल्ली डंडा: काशी में खेली गई खास प्रतियोगिता, संस्कृत में हुई कमेंट्री; छात्रों-अध्यापकों ने बचपन को किया याद
Sat, 27 Jul 2024 08:36 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Sat, 27 Jul 2024 08:36 PM IST
सार
Varanasi News: वाराणसी में आयोजित इस प्रतियोगिता में कई विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों की टीम ने हिस्सा लिया। संस्कृत में हो रही कमेंट्री ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद प्रतियोगियों को सम्मानित भी किया गया।
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गुल्ली-डंडा प्रतियोगिता में खेलते खिलाड़ी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आधुनिकता के इस दौर में जब मोबाइल नामक रोग ने सबको घेर लिया है। तब उससे बाहर निकलने के लिए प्रकृति के साथ संयोग करना आवश्यक हो जाता है। उसमें हमारे भारतीय खेल अतीवोपयोगी बनते हैं।
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इसी मानसिकता से भारतीय खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए शिक्षा मंत्रालय के प्रकल्प भारतीय ज्ञान परम्परा केंद्र द्वारा संस्कृत कमेंट्री के साथ कुलपति की अध्यक्षता में 27 जुलाई को ऐतिहासिक 'गिल्ली डंडा प्रतियोगिता' का प्रातः 8 बजे से भव्य आयोजन हुआ।
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इस दौरान डॉ. ज्ञानेंद्र सापकोटा संयोजक एवं डॉ. विजय कुमार शर्मा सह संयोजक रहे। वाराणसी स्थित विश्वविद्यालय, महाविद्यालय एवं गुरुकुलों से 4 टीमों ने प्रतिभाग किया। क्रमशः सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, श्रीस्वामी वेदांती वेद विद्यापीठ, श्रीस्वामीनारायणानन्दतीर्थ वेद विद्यालय, श्रीविश्वेश्वरवेद भवनम् शामिल रहगे।
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प्रथम राउंड श्रीविश्वेश्वरवेद भवनम् बनाम श्रीस्वामी वेदांतीवेद विद्यापीठ की टीम के बीच हुआ। प्रहार एवं क्षेत्ररक्षण के निर्णयार्थ कुलपति प्रो. बिहारीलाल शर्मा ने टॉस किया। गिल्ली को गुच्छी से उछाल कर खेल का उद्घाटन किया।
कुलपति सहित विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारी तथा अध्यापक ने भी खेल का आनंद लिया। इसके बाद पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन पाणिनी सभागार में हुआ। मंच संचालन डॉ. ज्ञानेन्द्र सापकोटा ने किया। अध्यक्षता कुलपति तथा मुख्य अतिथि समन्वयक IKS प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी रहे।
कुलपति महोदय के उद्बोधन से सभी छात्रों में भारतीय खेलों को लेकर अत्यधिक उत्साहवर्धन हुआ। डॉ. विजय कुमार शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में प्रो. अमित कुमार शुक्ल, प्रो. महेंद्र पांडेय, प्रो. जितेंद्र कुमार साही, प्रो. शैलेश मिश्र, प्रो, सुधाकर मिश्र, डॉ. दुर्गेश पाठक, डॉ. मधुसूदन मिश्र, डॉ. विजेंद्र आर्य, अखिलेश मिश्र, सुशील तिवारी, आदित्य कुमार, पियूष मिश्र आदि एवं केंद्र के सभी अनुसंधाता उपस्थित रहे।