गुलाबबाड़ी: 300 साल पुरानी परंपरा में उमड़े संगीत रसिक, छोड़ धर्म के झूठे धंधे, होरी खेलें बम भोला... ने मोहा
गुलाबबाड़ी कार्यक्रम में गायिका डाॅ. सोमा घोष ने अपनी आवाज से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गुलाब की पंखुड़ियों के बीच लोग वाह-वाह करते दिखे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सफेद कुर्ता-पायजामा, गुलाबी साड़ी, सिर पर दुपलिया टोपी, गले में गुलाबी दुपट्टा, ठंडई का स्वाद और हवा में बिखरती लाल गुलाब की पंखुड़ियां। कुल्हड़ में ठंडई के साथ ही रिश्तों की गरमाहट और गीत-संगीत की तीन सौ साल पुरानी महफिल गुलाबबाड़ी निखर उठी। इसके साथ ही ऋतु परिवर्तन की संगीतमयी दस्तक गुलाबबाड़ी के हर दिल को छू गई।
शनिवार को कला प्रकाश की ओर से बनारस बीड्स के सहयोग से रवींद्रपुरी में आयोजित गुलाब बाड़ी में उपशास्त्रीय गायन का जादू हर किसी के सिर चढ़कर बोला। पद्मश्री साेमा घोष ने गायन की शुरुआत ठुमरी पिया के आवन की आस... से की।
इसके बाद राधा कृष्ण की नोकझोंक पर आधारित होरी गीत होली खेलन नहीं जाने... सुनाकर पूरे माहौल में फागुन का अहसास कराया। इसके बाद याद पिया की..., ना मानूंगी और रंग डांलूगी नंद के लालन पर...पहुंचते-पहुंचते माहौल पूरी तरह से फाग के रंग में रंग गया।
गायिका ने भगवान शिव पर आधारित चैती कवने कारण सइयां भइले जोगिया हे रामा.... और शिव की होली छोड़ धर्म के झूठे धंधे, होरी खेलें बम भोला...प्रस्तुत किया। समापन उन्होंने आज की युवा पीढ़ी के लिए मॉडर्न होली गीत सुन राधा रानी देखो आई होली आई होली मुझसे तुम रुठी हो राधा मैं तो तेरा प्रेम दीवाना...सुनाया।
तबले पर पं. ललित कुमार, हारमोनियम पर पं. पंकज मिश्र ने संगत की। कार्यक्रम की शुरूआत मेजबान परिवार के अर्नव गुप्ता ने स्वतंत्र तबला वादन से किया। संचालन डॉ. शबनम खातून ने किया। आरंभ में कलाकारों का स्वागत अशोक कुमार गुप्ता, अशोक कपूर, सिद्धार्थ गुप्ता, शिवानी गुप्ता ने किया। इस मौके पर अनुज डिडवानिया, गोकुल शर्मा, महेश सेठ, हेमंत राय, डॉ. संगीता श्रीवास्तव मौजूद रहीं।