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बनारस में सामने आया महीनों से चल रहा अनाज घोटाला, ऐसे मारा जा रहा था गरीबों का हक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 26 Aug 2018 05:25 PM IST
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अनाज घोटाले के लिए चर्चित यूपी में एक और अनाज घोटाला सामने आया है। आधार कार्ड के नंबरों में हेराफेरी कर गरीबों के हिस्से का अनाज हड़पने वाले कई महीनों से यह खेल कर रह थे।
वाराणसी में इलेक्ट्रानिक प्वाइंट ऑफ सेल (ई पास) मशीन से वितरण होने वाले इलाके में यह गड़बड़ी सामने आई है। 27 दुकानें चिह्नित होने के बाद जिले की 542 दुकानों के अनाज वितरण और आधार कार्ड का सत्यापन किया जा रहा है। उधर, सूचना विज्ञान केंद्र के जरिए पूर्ति विभाग गड़बड़ी करने के तरीके और हेराफेरी को समझ रहा है।
पूर्ति विभाग की जांच में यह बात सामने आई है कि वाराणसी में शहरी क्षेत्र की सरकारी राशन की दुकानों पर यह घोटाला हुआ है। इसमें घोटाला करने वाले गैंग ने आधार कार्ड के नंबर एडिट कर उनकी जगह दूसरे नंबर फीड कर दिए। फिर नए फीड किए गए नंबर वाले लोगों के बायोमेट्रिक का उपयोग कर वास्तविक आधार कार्डों वाले लाभार्थियों के हिस्से का अनाज ले लिया।
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अनाज लेने के बाद पहले वाले आधार कार्ड के डाटाबेस में उसका वास्तविक नंबर फीड कर दिया गया। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खुली दुकानों में ई पास की सुविधा है और यही यह हेराफेरी की गई है।
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वाराणसी में इलेक्ट्रानिक प्वाइंट ऑफ सेल (ई पास) मशीन से वितरण होने वाले इलाके में यह गड़बड़ी सामने आई है। 27 दुकानें चिह्नित होने के बाद जिले की 542 दुकानों के अनाज वितरण और आधार कार्ड का सत्यापन किया जा रहा है। उधर, सूचना विज्ञान केंद्र के जरिए पूर्ति विभाग गड़बड़ी करने के तरीके और हेराफेरी को समझ रहा है।
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पूर्ति विभाग की जांच में यह बात सामने आई है कि वाराणसी में शहरी क्षेत्र की सरकारी राशन की दुकानों पर यह घोटाला हुआ है। इसमें घोटाला करने वाले गैंग ने आधार कार्ड के नंबर एडिट कर उनकी जगह दूसरे नंबर फीड कर दिए। फिर नए फीड किए गए नंबर वाले लोगों के बायोमेट्रिक का उपयोग कर वास्तविक आधार कार्डों वाले लाभार्थियों के हिस्से का अनाज ले लिया।
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अनाज लेने के बाद पहले वाले आधार कार्ड के डाटाबेस में उसका वास्तविक नंबर फीड कर दिया गया। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खुली दुकानों में ई पास की सुविधा है और यही यह हेराफेरी की गई है।
राशन की दुकानों पर नहीं होती कार्रवाई
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जिला पूर्ति अधिकारी दीपक वार्ष्णेय ने बताया कि सूचना विज्ञान केंद्र के जरिए गड़बड़ी करने वालों के तरीके और हेराफेरी को समझा जा रहा है ताकि भविष्य में आधार कार्ड के लिंक की सुरक्षा पुख्ता की जा सके। 27 दुकानों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जा रही है और 542 दुकानों का सत्यापन कराया जा रहा है।
सरकारी राशन की दुकानों पर कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति होती है। खाद्यान्न घोटाले के खुलासे के बाद दुकानें चिह्नित होने के बाद कार्रवाई के नाम पर कागजी खानापूर्ति हो रही है।
इससे पहले सरकारी राशन की दुकानों पर खाद्यान्न वितरण की शिकायतों पर भी विभाग गंभीर नहीं रहता। यही कारण है कि पिछले एक साल में 11 दुकानों का निलंबन किया गया, मगर लचर पैरवी के चलते इन दुकानों का आवंटन रद्द नहीं किया जा सका।
सरकारी राशन की दुकानों पर कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति होती है। खाद्यान्न घोटाले के खुलासे के बाद दुकानें चिह्नित होने के बाद कार्रवाई के नाम पर कागजी खानापूर्ति हो रही है।
इससे पहले सरकारी राशन की दुकानों पर खाद्यान्न वितरण की शिकायतों पर भी विभाग गंभीर नहीं रहता। यही कारण है कि पिछले एक साल में 11 दुकानों का निलंबन किया गया, मगर लचर पैरवी के चलते इन दुकानों का आवंटन रद्द नहीं किया जा सका।