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गोविंदाचार्य ने गौशाला प्रकरण पर चर्चा के लिए मोदी से मांगा समय
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Mon, 16 Feb 2015 02:22 AM IST
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गोइठहां में एसटीपी के लिए भूमिगत पाइप लाइन बिछाने में बड़े पैमाने में धांधली हुई है। पाइप बिछाने के बाद सड़क तो बनी लेकिन वह कई जगह धंसी हुई है। इससे साबित होता है कि इस काम में जबर्दस्त कमीशनखोरी हुई है। ये आरोप हैं गो रक्षा आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष केएन गोविंदाचार्य के।
उन्होंने बावनबीघा स्थित गौशाला को उजाड़कर उसी जमीन पर बन रहे एसटीपी की जोरदार मुखालफत की। कहा कि गौशाला के मामले में यहां के जनप्रतिनिधियों का रवैया संवेदनहीन है। प्रभावित लोगों से स्थानीय जनप्रतिनिधियों का अबतक कोई संवाद न होना चौंकाने वाला है।
गोविंदाचार्य ने कहा कि यह विंडबना है कि जिस सरकार ने महामना मालवीय को भारत रत्न से नवाजा, उसी सरकार के मुखिया के क्षेत्र में महामना की प्रेरणा से स्थापित गौशाला को उजाड़ा जा रहा है। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि बड़ी योजनाएं हमेशा जनहित में हों यह जरूरी नहीं, कई बार लंबा कमीशन खाने के चक्कर में भी योजनाएं लागू की जाती हैं। गोइठहां में एसटीपी की स्थापना
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भी कुछ इसी तरह का मामला है। इसकी जांच होनी चाहिए। हद तो तब हो गई जब बिना जमीन अधिग्रहण किये ही पाइप लाइन बिछा दी गई। कहा कि मैंने मोदी जी को पत्र लिखकर समय मांगा है। पत्र में लिखा है कि बनारस के किसान अपनी समस्या को लेकर आपसे मिलना चाहते हैं। यह भी लिखा है कि गौशाला बचाने के लिए मोदी जी खुद हस्तक्षेप करें।
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उन्होंने बावनबीघा स्थित गौशाला को उजाड़कर उसी जमीन पर बन रहे एसटीपी की जोरदार मुखालफत की। कहा कि गौशाला के मामले में यहां के जनप्रतिनिधियों का रवैया संवेदनहीन है। प्रभावित लोगों से स्थानीय जनप्रतिनिधियों का अबतक कोई संवाद न होना चौंकाने वाला है।
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गोविंदाचार्य ने कहा कि यह विंडबना है कि जिस सरकार ने महामना मालवीय को भारत रत्न से नवाजा, उसी सरकार के मुखिया के क्षेत्र में महामना की प्रेरणा से स्थापित गौशाला को उजाड़ा जा रहा है। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि बड़ी योजनाएं हमेशा जनहित में हों यह जरूरी नहीं, कई बार लंबा कमीशन खाने के चक्कर में भी योजनाएं लागू की जाती हैं। गोइठहां में एसटीपी की स्थापना
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भी कुछ इसी तरह का मामला है। इसकी जांच होनी चाहिए। हद तो तब हो गई जब बिना जमीन अधिग्रहण किये ही पाइप लाइन बिछा दी गई। कहा कि मैंने मोदी जी को पत्र लिखकर समय मांगा है। पत्र में लिखा है कि बनारस के किसान अपनी समस्या को लेकर आपसे मिलना चाहते हैं। यह भी लिखा है कि गौशाला बचाने के लिए मोदी जी खुद हस्तक्षेप करें।