राज्यपाल का निर्देश- बैरक से जेल के मुख्य द्वार तक बुजुर्ग कैदियों को मिलेगी ई-रिक्शा की सुविधा
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वाराणसी सेंट्रल जेल के अशक्त और वृद्ध कैदियों को अब अगर कहीं बाहर जाना होगा तो वह अपने बैरक से कारागार के मुख्य द्वार तक ई-रिक्शा से जाएंगे। इसके लिए दो ई-रिक्शा की व्यवस्था राजभवन से की जाएगी। यह निर्देश बुधवार को प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दिया।
अपने तीन दिवसीय वाराणसी दौरे के दौरान बुधवार को राज्यपाल ने केंद्रीय कारागार का निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्रीय कारागार में स्थापित अमर शहीद क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किया। इसके साथ ही आजाद की प्रतिमा के समीप स्थापित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के स्मृति स्तंभ के बारे में जेल अधीक्षक से राज्यपाल ने जानकारी ली।
इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जेल अधीक्षक से पूछा कि अशक्त और वृद्ध कैदियों को यदि जेल से बाहर किसी कारण से जाना हो तो बैरक से मुख्य द्वार तक उन्हें कैसे लाया जाता है। जेल अधीक्षक ने बताया कि बैरक से पैदल ही लाया जाता है।
इतना सुनते ही राज्यपाल ने कहा कि जेल में दो ई-रिक्शा की व्यवस्था जल्द ही की जाए और उसका व्यय राजभवन उठाएगा। जेल में स्थित गौशाला के निरीक्षण के दौरान उन्होंने गायों को केला और गुड़ आदि खिलाया। निरीक्षण के दौरान राज्यपाल ने जेल के कैदियों से भी मुलाकात की और विभिन्न विधा में निपुण कारीगरों के उत्पाद का अवलोकन किया। बेकरी के उत्पाद, फर्नीचर में गवर्नर चेयर, तौलिया-गमछा के साथ ही सब्जियों को देख कर उन्होंने कैदियों के हुनर की खासी प्रशंसा की।