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राजकीय आयुर्वेद अस्पताल: 13 ओपीडी, 400 से ज्यादा मरीज, काउंटर पर 210 में से सिर्फ 12 दवाएं

Wed, 16 Sep 2026 02:09 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Wed, 16 Sep 2026 02:09 PM IST
सार

वाराणसी में राजकीय आयुर्वेद अस्पताल में पेट, खांसी-जुकाम, भूख लगने की दवाओं तक स्टॉक सीमित है। यहां कई जरूरी औषधियां खत्म हैं। इस अस्पताल में वाराणसी सहित आसपास के जिलों से भी हर दिन 400 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं।

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Government Ayurveda Hospital 13 OPDs over 400 patients only 12 out of 210 medicines available at counter
राजकीय आयुर्वेद अस्पताल का दवा काउंटर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजकीय आयुर्वेद अस्पताल, चौकाघाट में इन दिनों दवाओं का संकट गहरा गया है। अस्पताल में 13 ओपीडी संचालित होती हैं, लेकिन मरीजों के लिए निर्धारित 210 दवाओं में से इस समय महज 12 ही उपलब्ध हैं। इनमें भी करीब पांच दवाएं पेट संबंधी बीमारियों की हैं। इसके अलावा खांसी-जुकाम, कफ, भूख न लगने और त्वचा रोग से जुड़ी दवाएं ही फार्मेसी में बची हैं। ऐसे में डॉक्टर को दिखाने के बाद पर्चा लेकर दवा काउंटर पर पहुंच रहे मरीजों को अधिकांश दवाएं बाहर की दुकानों से खरीदनी पड़ रही हैं।

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अस्पताल में रोजाना वाराणसी समेत आसपास के जिलों से 400 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें स्त्री रोग, नेत्र रोग, कान-नाक-गला, बाल रोग, पेट संबंधी बीमारी और घुटने के दर्द समेत विभिन्न रोगों के मरीज शामिल हैं। दवाओं की कमी का असर अस्पताल के दवा काउंटर पर भी नजर आ रहा है। मंगलवार को ओपीडी के दौरान यहां महज चार-पांच मरीज ही दवा लेने पहुंचे। सामान्य दिनों में दवाएं उपलब्ध होने पर महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग कतार लगती है।

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काउंटर पर चस्पा की दवाओं की सूची
अस्पताल के दवा काउंटर पर उपलब्ध दवाओं की सूची चस्पा की गई है। सूची में 14 दवाओं के नाम दर्ज हैं, लेकिन इनमें से दो नाम काट दिए गए हैं। कर्मचारियों के अनुसार वर्तमान में सिर्फ 12 दवाएं ही उपलब्ध हैं। मरीज जब डॉक्टर का पर्चा लेकर काउंटर पर पहुंचते हैं तो उपलब्ध दवाओं की सूची देखकर उन्हें शेष दवाएं बाहर से खरीदने की सलाह दी जाती है। दवा काउंटर पर पांच कर्मचारियों की ड्यूटी है। वे मरीजों को उपलब्ध दवाओं की सूची दिखाकर स्थिति की जानकारी दे रहे हैं। अस्पताल में गर्भवती महिलाओं, नेत्र रोगियों और अन्य जटिल बीमारियों से जुड़ी कई जरूरी आयुर्वेदिक औषधियां भी उपलब्ध नहीं हैं।

बाहर से दवा खरीदना मजबूरी
अस्पताल में दवाएं नहीं मिलने के कारण मरीजों को गेट के बाहर स्थित आयुर्वेदिक दवा की दुकानों से खरीदारी करनी पड़ रही है। इससे सरकारी अस्पताल में उपचार कराने आए मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कई मरीजों का कहना है कि डॉक्टर की लिखी गई दवाओं में से एक-दो दवाएं ही अस्पताल में मिलती हैं। बाकी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।
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केस-1
चंदौली के 45 वर्षीय रामनरेश गिरी आंख में संक्रमण की समस्या लेकर अस्पताल पहुंचे थे। चिकित्सक ने उन्हें तीन दवाएं लिखीं। दवा काउंटर पर पहुंचे तो इनमें से कोई दवा उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद उन्हें बाहर की दुकान से दवा खरीदनी पड़ी।

केस-2
जौनपुर के पुत्तूलाल यादव त्वचा संबंधी समस्या का उपचार कराने अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टर ने दवा लिखी, लेकिन काउंटर से केवल एक दवा मिल सकी। बाकी दवाएं उन्हें बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ीं।

सितंबर में फिलहाल यही दवाएं उपलब्ध
अस्पताल में सितंबर के लिए चस्पा की गई उपलब्ध दवाओं की सूची के अनुसार इस समय हरीतकी चूर्ण, विभीतकी चूर्ण, आमलकी चूर्ण, षटसकार चूर्ण, पंचकोल चूर्ण, कफकेतु रस, शुद्ध नरसार, कुट जत्वक चूर्ण, आयुष क्वाथ, नीम चूर्ण, सितोपलादि चूर्ण और अभयारिष्ट उपलब्ध हैं। इनमें नीम चूर्ण त्वचा संबंधी समस्याओं में, पंचकोल चूर्ण भूख बढ़ाने में और हरीतकी, विभीतकी व आमलकी चूर्ण पेट साफ करने तथा कब्ज जैसी समस्याओं में उपयोग किए जाते हैं।

अस्पताल में इस समय कुछ दवाओं की कमी है। मरीजों की समस्याओं को देखते हुए जरूरी दवाएं मंगाई जा रही हैं। अस्पताल में नई फार्मेसी भी बनाई जानी है। इसके बाद दवाओं का संकट दूर हो जाएगा। -प्रो. डीके मौर्य, प्रधानाचार्य, राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, चौकाघाट

वाराणसी ही नहीं हर जगह दवाओं का संकट
प्रदेश में आठ राजकीय आयुर्वेद कॉलेज/अस्पताल हैं। वाराणसी के अलावा बांदा, पीलीभीत, लखनऊ, झांसी, मुजफ्फरनगर, बरेली और हंडिया में आयुर्वेद कॉलेज/अस्पताल हैं। वर्तमान समय में लगभग सभी जगह में दवाओं का संकट है। इसके अलावा जांच की सुविधाएं भी पूरी नहीं मिल पाती हैं। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में भी प्रदेश के राजकीय आयुर्वेद कॉलेजों में शैक्षणिक संकाय समेत अन्य मानव संसाधनों की कमी बताई गई है। महाविद्यालयों में शिक्षकों के पद भी खाली हैं। कैग ने अपनी रिपोर्ट में अस्पतालों में चिकित्सीय जांच और आपातकालीन सुविधाओं की स्थिति भी मानक के अनुरूप नहीं पाया था। स्थानीय स्तर पर वाराणसी में भी लोगों को जांच की सुविधाएं नियमित नहीं मिल पाती हैं।
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