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भूत विद्या, रसायन और वाजीकरण को सरकार की मंजूरी
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बीएचयू आयुर्वेद संकाय में नए पाठ्यक्रम भूत विद्या, रसायन और वाजीकरण को सरकार से मंजूरी मिल गई है। 16 फरवरी 2022 को गजट नोटिफिकेशन में भी तीनों पाठ्यक्रमों को मंजूरी देने के साथ ही इसका प्रकाशन किया गया। आयुर्वेद संकाय प्रमुख प्रो. केएन द्विवेदी ने सरकार के राजपत्र का स्वागत कर इसे संकाय के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है।
बीएचयू आयुर्वेद संकाय प्रमुख प्रो. केएन द्विवेदी ने बताया कि अष्टांग आयुर्वेद की स्थापना के लिए देश में पहली बार तीन नए पाठ्यक्रमों की पहल की गई थी। आयुर्वेद के आठ अंगों में से पांच अंग आयुर्वेद महाविद्यालयों में पूर्व से संचालित किए जा रहे थे। तीन नए पाठ्यक्रम में भूतविद्या/ ग्रह/ मानस, रसायन एवं वाजीकरण को संकाय स्तर की समिति से पास करने के बाद पूर्व संकाय प्रमुख प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी द्वारा अकेडमिक काउंसिल में 10 जून 2019 को भी रखा गया था। यहां से मंजूरी मिली और फिर 30 नवंबर 2019 को एग्जीक्यूटिव काउंसिल से अनुमोदन प्राप्त होने के बाद नए पाठ्यक्रम में आवेदन भी छात्रों ने किया था। संकाय प्रमुख ने बताया कि कुछ लोगों ने भ्रम फैलाया तो आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों को स्थापित किए जाने के लिए सरकार को पत्र भी भेजा गया था। संकाय में नाड़ी एवं प्रकृति परीक्षा के लोकप्रियता के कारण पूरे देश में हर आयुर्वेदिक महाविद्यालय में ओपीडी चलाने के लिए वैद्य सुशील कुमार दूबे द्वारा 12 दिसंबर 2019 को प्रस्ताव पूर्व संकाय प्रमुख प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी के माध्यम से आयुष मंत्रालय को भेजा गया था। मंत्रालय ने 9 जनवरी 2020 को ओपीडी चलाने की दिशा में भी पहल कर प्रस्ताव को केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद को निर्देशित किया था। अब गजट नोटिफिकेशन के बाद जल्द ही तीन नए पाठ्यक्रम के साथ ही नाड़ी, प्रकृति परीक्षा भी जल्द ही शुरू की जाएगी।
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बीएचयू आयुर्वेद संकाय प्रमुख प्रो. केएन द्विवेदी ने बताया कि अष्टांग आयुर्वेद की स्थापना के लिए देश में पहली बार तीन नए पाठ्यक्रमों की पहल की गई थी। आयुर्वेद के आठ अंगों में से पांच अंग आयुर्वेद महाविद्यालयों में पूर्व से संचालित किए जा रहे थे। तीन नए पाठ्यक्रम में भूतविद्या/ ग्रह/ मानस, रसायन एवं वाजीकरण को संकाय स्तर की समिति से पास करने के बाद पूर्व संकाय प्रमुख प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी द्वारा अकेडमिक काउंसिल में 10 जून 2019 को भी रखा गया था। यहां से मंजूरी मिली और फिर 30 नवंबर 2019 को एग्जीक्यूटिव काउंसिल से अनुमोदन प्राप्त होने के बाद नए पाठ्यक्रम में आवेदन भी छात्रों ने किया था। संकाय प्रमुख ने बताया कि कुछ लोगों ने भ्रम फैलाया तो आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों को स्थापित किए जाने के लिए सरकार को पत्र भी भेजा गया था। संकाय में नाड़ी एवं प्रकृति परीक्षा के लोकप्रियता के कारण पूरे देश में हर आयुर्वेदिक महाविद्यालय में ओपीडी चलाने के लिए वैद्य सुशील कुमार दूबे द्वारा 12 दिसंबर 2019 को प्रस्ताव पूर्व संकाय प्रमुख प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी के माध्यम से आयुष मंत्रालय को भेजा गया था। मंत्रालय ने 9 जनवरी 2020 को ओपीडी चलाने की दिशा में भी पहल कर प्रस्ताव को केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद को निर्देशित किया था। अब गजट नोटिफिकेशन के बाद जल्द ही तीन नए पाठ्यक्रम के साथ ही नाड़ी, प्रकृति परीक्षा भी जल्द ही शुरू की जाएगी।
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