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गोपालदास नीरज बोले, साहित्य से नाता जोड़ें युवा

Wed, 29 Apr 2015 02:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी Updated Wed, 29 Apr 2015 02:43 AM IST
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Gopal Das Neraj Sed, Yuth Suld Attached For Literecher
वाराणसी। गीतकार गोपालदास नीरज के साथ मंगलवार की रात कुछ पल जीने, गुनगुनाने के लिए अस्सी घाट पर लोग बेताब दिखे। इसमें उनका दौर देख चुके पुरनिये भी थे और नई पीढ़ी के युवा भी। उन्होंने युवाओं को साहित्य से नाता जोड़ने को कहा। इस अजीम गीतकार ने अपने खास अंदाज में पुराने गीतों, मुक्तकों को गुनगुनाना शुरू किया। श्रोता दत्तचित्त उन्हें सुनने और गुनने लगे।
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उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान की ओर से आयोजित कवि गोष्ठी में रात साढ़े नौ बजे नीरज ने माइक संभाला और मुक्तक ‘तन से भारी सांस है इसे समझ लो खूब,  मुर्दा जल में तैरता जिंदा जाता डूब।’ उसके बाद तो वे तरन्नुम में ‘दुखते हुए जख्मों पे हवा कौन करे’ और ‘कफन बढ़ा को किसलिए नजर तूं डबडबा गई’ गीतों के जरिए दिल के पन्ने एक-एक कर खोल दिए। रूमानी गीतों के साथ-साथ उन्होंने ‘मत पूछ इस दौर में क्या क्या न बिका, इंसानों ने आंखों की शरम तक बेची’ और  ‘अब उजालों को वनवास ही लेना पड़ेगा’ जैसी कविताओं
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से समाज की हकीकत भी बयां की। फरमाइश पर ऐ भाई जरा देख के चलो..., कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे...जैसे नग्मे भी सुनाए।  सुरेश अवस्थी, भूषण त्यागी, अशोक अज्ञान, शरफ बहराइच, अशोक चौबे, बदरी विशाल समेत तमाम कवियों ने काव्यपाठ किया। संचालन किया सर्वेश अस्थान और प्रमोद मिश्र ने। उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के अपर निदेशक ब्रजेश चंद्र और जिला सांस्कृतिक समिति के सचिव डॉ. रत्नेश वर्मा ने आभार जताया।
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