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परिणय सूत्र में बंधे भगवान विश्वेश्वर और माता गौरा, झांकी के दर्शन के लिए लगा तांता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 14 Feb 2018 12:45 AM IST
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विवाह से पहले विधिविधान से पूरी की गईं मातृका पूजन सहित अन्य रस्में
- फोटो : अमर उजाला
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महाशिवरात्रि पर काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ के विवाहोत्सव की खुशियां शहर भर में मनाई गईं। जगह-जगह शिव बारात निकली और बाजे-गाजे के साथ हजारों काशीवासी बाराती पर जमकर झूमे-नाचे। इस बीच, रेडजोन स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी के आवास पर विधिविधान से बाबा के विवाहोत्सव की रस्में संपन्न हुईं।
सप्तऋषि आरती के मध्य भगवान विश्वेश्वर और माता गौरा के परिणयसूत्र की रस्में हुईं तो मंत्रोच्चार की पावन अनुगूंज के बीच हर-हर महादेव के जयघोष गूंज उठे। महंत आवास पर फूलों का मौर धारण किए बाबा विश्वनाथ और लाल चुनरी में सजी मां गौरा की नयनाभिराम झांकी के दर्शन के लिए तांता लग गया।
इस दौरान महंत डॉ. कुलपति तिवारी के आचार्यत्व में बाबा विश्वनाथ और माता गौरा की आरती-पूजन के साथ जनकल्याण, शांति और खुशहाली की कामना की गई। बाबा विश्वनाथ के विवाह की रस्म सप्तऋषि आरती के सात अर्चकों ने संपन्न कराई।
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पढ़ेंः महाशिवरात्रि पर शिव बारात में उतरी तीनों लोकों की झांकी, खूब उड़े अबीर-गुलाल, देखें तस्वीरें
पुराणों के अनुसार काशी पुराधिपति को सप्तऋषि द्वारा की गई आरती प्रिय है, इसलिए परंपरानुसार सप्तऋषि आरती के अर्चक ही विवाह की रस्में संपन्न कराते हैं। प्रधान अर्चक पंडित शशिभूषण त्रिपाठी (गुड्डू महाराज) के नेतृत्व में सातों अर्चकों ने वैदिक रीति से विवाह संपन्न कराया।
इस दौरान बाबा को ठंडई, भांग, फल-फूल अर्पित किए गए। अबीर-गुलाल चढ़ा कर श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया। विवाहोत्सव से पहले महंत आवास पर मातृका पूजन हुआ।
पढ़ेंः महादेव के जयकारों से गूंजा काशी का कोना-कोना, बाबा दरबार में अटूट कतार
इस मौके पर भगवान ब्रह्मा, विष्णु और अन्य आदि देवों से भगवान शंकर की बारात में शामिल होने वाले अड़भंगी बारातियों के लिए आज्ञा मांगी गई। फिर आटे की बेदी बनाई गई।
जिसमें 400 साल पुराने स्फटिक एवं नर्मदेश्वर के शिवलिंग को दीक्षित मंत्रोच्चार से प्रतिष्ठित किया गया। उसके बाद आचार्य सुधीर कुमार मिश्र और दो अन्य वैदिक ब्राह्मणों ने शिवलिंग का अभिषेक किया।
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सप्तऋषि आरती के मध्य भगवान विश्वेश्वर और माता गौरा के परिणयसूत्र की रस्में हुईं तो मंत्रोच्चार की पावन अनुगूंज के बीच हर-हर महादेव के जयघोष गूंज उठे। महंत आवास पर फूलों का मौर धारण किए बाबा विश्वनाथ और लाल चुनरी में सजी मां गौरा की नयनाभिराम झांकी के दर्शन के लिए तांता लग गया।
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इस दौरान महंत डॉ. कुलपति तिवारी के आचार्यत्व में बाबा विश्वनाथ और माता गौरा की आरती-पूजन के साथ जनकल्याण, शांति और खुशहाली की कामना की गई। बाबा विश्वनाथ के विवाह की रस्म सप्तऋषि आरती के सात अर्चकों ने संपन्न कराई।
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पुराणों के अनुसार काशी पुराधिपति को सप्तऋषि द्वारा की गई आरती प्रिय है, इसलिए परंपरानुसार सप्तऋषि आरती के अर्चक ही विवाह की रस्में संपन्न कराते हैं। प्रधान अर्चक पंडित शशिभूषण त्रिपाठी (गुड्डू महाराज) के नेतृत्व में सातों अर्चकों ने वैदिक रीति से विवाह संपन्न कराया।
इस दौरान बाबा को ठंडई, भांग, फल-फूल अर्पित किए गए। अबीर-गुलाल चढ़ा कर श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया। विवाहोत्सव से पहले महंत आवास पर मातृका पूजन हुआ।
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इस मौके पर भगवान ब्रह्मा, विष्णु और अन्य आदि देवों से भगवान शंकर की बारात में शामिल होने वाले अड़भंगी बारातियों के लिए आज्ञा मांगी गई। फिर आटे की बेदी बनाई गई।
जिसमें 400 साल पुराने स्फटिक एवं नर्मदेश्वर के शिवलिंग को दीक्षित मंत्रोच्चार से प्रतिष्ठित किया गया। उसके बाद आचार्य सुधीर कुमार मिश्र और दो अन्य वैदिक ब्राह्मणों ने शिवलिंग का अभिषेक किया।