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रक्षाबंधन: 15 प्रतिशत महंगी बिकेंगी मिठाइयां, 30 दिन में 36 रुपये बढ़े चीनी के दाम; 11 साल में लगभग दोगुना रेट

Sun, 23 Aug 2026 04:10 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 23 Aug 2026 04:10 PM IST
सार

वाराणसी में चीनी के दाम 30 दिन में 36 रुपये बढ़कर 80 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गए हैं। 11 साल में चीनी की कीमत 44 से बढ़कर 80 रुपये किलो हो गई है। बढ़ती लागत का असर रक्षाबंधन पर मिठाइयों पर भी पड़ेगा। कारोबारियों के अनुसार इस बार मिठाइयां करीब 15 प्रतिशत महंगी बिकने की संभावना है।

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Raksha Bandhan Sweets cost 15 percentage more sugar prices rose 36 in 30 days rates nearly doubled in 11 years
रक्षाबंधन पर महंगी होगी मिठाई। - फोटो : Adobe stock

विस्तार

रक्षाबंधन और अन्य त्योहारों पर मिठाई का स्वाद कड़वा लग सकता है। चीनी की बढ़ती कीमतें आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रही हैं। 

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30 दिनों में फुटकर बाजार में चीनी का भाव 36 रुपये बढ़कर 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। इसके कारण मिठाई से लेकर बनारस की प्रसिद्ध चाय, बेकरी, टॉफी-बिस्किट के कारोबार पर संकट मंडराने लगा है। एक महीने पहले फुटकर बाजार में 44 रुपये प्रति किलोग्राम मिलने वाली चीनी की कीमत अब 80 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।
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चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच शहर के अधिकतर मिठाई विक्रेताओं ने दाम 10 से 15 प्रतिशत बढ़ा दिए हैं। जिस मिठाई की कीमत 500 रुपये प्रति किलोग्राम थी, उसकी कीमत बढ़कर 550 से 575 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो गई है। मिठाई कारोबारियों के मुताबिक, अकेले रक्षाबंधन पर तकरीबन 12 हजार कुंतल मिठाई की खपत होती है। 

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एक त्योहार पर तकरीबन 100 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। लहुराबीर के मिठाई विक्रेता शुभम यादव बताते हैं कि चीनी की कीमत बढ़ने से मिठाइयों की लागत बढ़ गई है, जिसके कारण मिठाइयों की कीमत बढ़ाना मजबूरी हो गई है। गोदौलिया, चौक, मैदागिन, लंका, अर्दली बाजार, शिवपुर, पांडेयपुर, राजघाट, कचहरी और दशाश्वमेध समेत कई इलाके ऐसे हैं, जहां चाय की खपत सबसे अधिक होती है। चाय विक्रेताओं का कहना है कि कुछ दिनों में चीनी के दाम नियंत्रित नहीं हुए तो चाय की कीमत बढ़ाना मजबूरी हो जाएगी। 

चौक के चाय विक्रेता राजेश यादव बताते हैं कि चाय के दाम बढ़े तो कारोबार पर संकट खड़ा हो जाएगा। कारोबारियों के मुताबिक, वर्ष 2015 में चीनी के उत्पादन में गिरावट आने पर इसके दाम 34 रुपये से बढ़कर 38 रुपये प्रति किलोग्राम हुए थे, यानी तब केवल 4 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई थी। इसके मुकाबले पिछले 11 वर्षों में चीनी के दाम दोगुने से अधिक बढ़ चुके हैं।

महानगर उद्योग व्यापार समिति के अध्यक्ष अशोक जायसवाल बताते हैं कि त्योहारों के मद्देनजर मिठाई निर्माताओं, बेकरी संचालकों और कन्फेक्शनरी कारोबारियों के सामने उत्पादन लागत को नियंत्रित रखना बड़ी चुनौती बन गया है। ग्राहकों के छिटकने के डर से वे तुरंत चाय की कीमत नहीं बढ़ा पा रहे हैं।

आवक घटने से उछले दाम नवंबर से पहले राहत नहीं
विशेश्वरगंज भैरोनाथ व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रतीक गुप्ता के अनुसार, थोक मंडियों में चीनी की आपूर्ति और आवक घटने के कारण कीमतों में यह तेजी आई है। वहीं, स्थानीय कारोबारी पंकज अग्रवाल का कहना है कि गन्ने की नई फसल और मिलों में नए पेराई सत्र की शुरुआत के बाद ही आपूर्ति पटरी पर लौटेगी। नई खेप की आवक नवंबर से पहले संभव नहीं दिख रही है। 

चीनी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सीमित आयात से तत्काल राहत मिल सकती है लेकिन इसे स्थायी समाधान नहीं बनाया जाना चाहिए। चीनी मिलों को चीनी, एथेनॉल और बायो-एनर्जी के इंटीग्रेटेड मॉडल पर मजबूत करना होगा। जमाखोरी रोकने के लिए रियल टाइम स्टॉक और प्राइस मॉनिटरिंग भी जरूरी है। किसान गन्ने का  उत्पादन बढ़ाएं। - डॉ. स्मिता शाह, सदस्य, नेशनल ट्रेड वेलफेयर बोर्ड, वाणिज्य मंत्रालय

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