UP: अंतरराष्ट्रीय नारी महाकुंभ में गूंजी भारतीय संस्कृति की महिमा, माता जानकी के आदर्शों को अपनाने का आह्वान
Jaunpur News: जलालपुर के पुरेव गांव में आयोजित नौ दिवसीय अंतरराष्ट्रीय नारी महाकुंभ के दूसरे दिन लोक कला और संस्कृति को समर्पित कार्यक्रम हुआ। महिलाओं की जानकी टोली गठित की गई, जो गांव-गांव जाकर लोकगीतों के माध्यम से माता जानकी के आदर्शों का प्रचार करेगी। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण में लोकगीत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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जौनपुर के जलालपुर क्षेत्र के पुरेव गांव स्थित बड़कू हनुमान जी मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय अंतरराष्ट्रीय नारी महाकुंभ के दूसरे दिन भारतीय संस्कृति, नारी शक्ति और माता जानकी के आदर्शों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में देशभर से आए संतों, विद्वानों और हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। विशाल पंडाल में आयोजित समारोह में लगभग पांच हजार महिलाओं और पुरुषों की उपस्थिति रही।
सनातन धर्म सम्राट जगद्गुरु श्री बालक देवाचार्य जी ने विश्व में पहली बार आयोजित मातु जानकी कथा के दौरान कहा कि भारतीय नारियों ने सदियों से लोक कला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि लोक कला और संस्कृति केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के इतिहास, मूल्यों और जीवनशैली का दर्पण हैं। भारतीय महिलाएं लोकगीत, लोकनृत्य, हस्तकलाओं और परंपराओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य करती रही हैं।
उन्होंने माता जानकी के वनवासी जीवन को भारतीय नारी शक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण बताते हुए कहा कि उन्होंने त्याग, समर्पण, धैर्य और मर्यादा के उच्च आदर्श स्थापित किए। महिलाओं द्वारा परिवार और समाज में संस्कृति के संरक्षण को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि घर-परिवार की प्रथम शिक्षिका होने के नाते महिलाएं बच्चों को संस्कार, लोककथाएं, रीति-रिवाज और नैतिक मूल्य प्रदान करती हैं।
समारोह को संबोधित करते हुए विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राम पंथ के पंथाचार्य प्रो. (डॉ.) राजीव श्री गुरुजी ने कहा कि भारतीय समाज में बढ़ती ईर्ष्या, नफरत और पारिवारिक विघटन का मुख्य कारण अपनी संस्कृति से दूर होना है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति त्याग, समर्पण और कर्तव्य को सर्वोपरि मानती है, जबकि आधुनिक भौतिकवादी सोच अधिकारों की होड़ को बढ़ावा देती है।
डॉ. राजीव ने भगवान राम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और माता जानकी के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका त्याग और आदर्श आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि माता जानकी केवल आदर्श पत्नी ही नहीं, बल्कि विद्वत्ता, साहस, आत्मसम्मान और नेतृत्व क्षमता की भी प्रतीक थीं। उन्होंने महिलाओं से शिक्षा, आत्मनिर्भरता और आत्मरक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने ढोल की थाप पर पारंपरिक लोकगीत प्रस्तुत कर ग्रामीण संस्कृति की जीवंत झलक दिखाई। समारोह में बड़कू हनुमान आश्रम के मठाधीश स्वामी प्रभु रामदास जी, धर्म प्रवक्ता डॉ. कवीन्द्र नारायण, समाजसेवी शैलेंद्र शुक्ला, डॉ. अर्चना भारतवंशी, डॉ. मृदुला जायसवाल, डॉ. नजमा परवीन, नौशाद दुबे, ओबैदुल्लाह दुबे सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और नारी सम्मान के संरक्षण का संकल्प भी दोहराया गया।