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बेटियों ने पुलिस से पूछे सवाल- 'घर में ही नहीं है महफूज, बाहर सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?'

Sat, 03 Aug 2019 01:11 AM IST
Sayali Maurya पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: Sayali Maurya Updated Sat, 03 Aug 2019 01:11 AM IST
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Girls questioning to police for safety by sexual harassment in varanasi
प्रतीकात्मक तस्वीर

जीजा घर आते हैं तो हमेशा अजीबोगरीब तरीके से छूने की कोशिश करते हैं...। फुफेरा भाई हमारे घर आता है तो अजीब तरीके से घूरता है...। हमारे चाचा हमें जबरन पकड़ने की कोशिश करते हैं...। 

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इस तरह की ऐसी 69 शिकायतें बालिका सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत जुलाई महीने में स्कूल-कॉलेजों की छात्राओं ने पुलिस से की। पुलिस से बच्चियों का सवाल था कि जब हम अपने घर के भीतर ही सुरक्षित ही नहीं हैं तो बाहर हमारी सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा।
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एक जुलाई से 31 जुलाई तक जिले के स्कूल-कॉलेजों में बालिका सुरक्षा जागरूकता अभियान चला कर उन्हें 100, 1090, 181, 1098 जैसे महत्वपूर्ण नंबरों की जानकारी दी गई। इस दौरान अभियान की कोऑर्डिनेटर डीएसपी स्नेहा तिवारी और उनकी टीम की महिला सब इंस्पेक्टरों ने छात्राओं से बातचीत कर उन्हें बिना किसी संकोच के अपनी परेशानियां बताने को कहा।

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एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि इस दौरान तकरीबन 90 बच्चियों ने शिकायतें सुनाईं। इनमें से 21 बच्चियां ऐसी थीं, जिन्हें स्कूल-कॉलेज जाने के दौरान शोहदे परेशान करते थे। उन बच्चियों की शिकायतों का संबंधित थानेदारों के माध्यम से समाधान कराया गया।

69 बच्चियां ऐसी हैं जिन्होंने अपने परिजनों की ही शिकायत की है। ऐसी बच्चियों और उनके परिजनों की एनजीओ के माध्यम से काउंसलिंग कराई जाएगी। यह बच्चियां चाहेंगी तो उनकी तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

साढ़े चार लाख बच्चियों से संवाद, प्रदेश में पहला स्थान :
एसएसपी ने बताया कि जुलाई महीने में हमने 1100 स्कूलों की साढ़े चार लाख से ज्यादा बच्चियों से संवाद किया। प्रदेश भर में ऐसा किसी जिले में नहीं हुआ। हमारा प्रयास है कि पुलिस टीमें दोबारा इन स्कूलों में जाएं और बच्चियों से फीडबैक लें। बच्चियों को उनकी सुरक्षा के बारे में जो बताया गया है, वह उनके हावभाव और व्यवहार में दिखाई भी देना चाहिए।

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