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छात्राएं सक्षम बनें और खुद करें अपनी सुरक्षा

Fri, 19 Nov 2021 11:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 19 Nov 2021 11:18 PM IST
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Girls become competent and protect yourself
अपराजिता के तहत आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं को जानकारी देते संत कबीर पब्लिक स्कूल के प्रधानाच - फोटो : GHAZIPUR
आत्मरक्षा के गुर सीख कर छात्राएं खुद सक्षम बनें, ताकि जरूरत पड़ने पर अपनी सुरक्षा कर सकें। हिम्मत, साहस और लगन के साथ शिक्षा ग्रहण कर मुकाम प्राप्त करें। शुक्रवार को सेल्फ डिफेंस कार्यशाला में प्रधानाचार्य पंकज सिंह ने छात्राओं का उत्साह बढ़ाते हुए ये बातें कहीं। शहर के तुलसी सागर स्थित संत कबीर पब्लिक स्कूल में अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत आयोजित कार्यशाला में 50 छात्राओं ने भाग लिया।
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प्रधानाचार्य पंकज सिंह ने कहा कि बेटियों के प्रति सोच में परिवर्तन लाने की जरूरत है। लड़कियां कमजोर नहीं हैं। आज महिलाएं बड़े पदों पर आसीन हैं। कहा कि अभी भी बहुत से बच्चियों की पढ़ाई छुड़वा दी जाती है। ऐसे में उनकी प्रतिभाएं सामने नहीं आ पाती। कहा, बेटियों को बेटों के बराबर अधिकार दिया जाना चाहिए। उप प्रधानाचार्य आदित्य नारायण ने कहा कि छात्राएं आत्मरक्षा के गुर सीख कर कहीं भी बेखौफ आ-जा सकती हैं। जरूरत पड़ने पर अपनी रक्षा खुद कर सकती हैं। बच्चियां कमजोर नहीं होती हैं। उनको कमजोर समझने की भूल की जाती है। कार्यशाला में ताइक्वांडो प्रशिक्षक सुशील कुमार गुप्ता ने बेटियों को आत्मरक्षा की बारीकियां सिखाईं। अपने बचाव और सामने वाले को प्रहार से असहाय करने की तकनीक बताई। करीब एक घंटे तक चले इस प्रशिक्षण कार्यशाला में शारीरिक ऊर्जा का आत्मरक्षा में सदुपयोग करने और हर स्थिति में मानसिक तौर पर मजबूत बनने की सलाह दी गई।
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- महिलाओं के प्रति हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। इस कारण उनके सामने सुरक्षा की चुनौती है। ऐसे में छात्राओं का आत्मरक्षा के गुर सिखाना बेहतर पहल है। - अनन्या
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- बदलते परिवेश में सोच बदली है। लड़कियों को शारीरिक तौर पर कमजोर समझा जाता था लेकिन हकीकत यह है कि लड़कियां बेहद मजबूत हुई हैं। - आरुषि
- आत्मरक्षा के जो गुर सिखाए गए हैं, वे भविष्य में काम आएंगे। आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षित छात्राएं बेखौफ होकर कहीं आ जा सकती हैं। - आकांक्षा
- मम्मी अक्सर कहीं अकेले जाने से रोकती हैं। अब आत्मरक्षा के गुर सीख कर उनका भरोसा जीत लूंगी। छात्राओं के लिए यह बहुत जरूरी है। - रागिनी
- महिला सशक्तीकरण के लिए यह सशक्त उपाय है। इसके लिए अमर उजाला ने अच्छी पहल की है। इसका छात्राओं को लाभ मिलेगा। - सृष्टि
- स्कूल में भविष्य में भी आत्मरक्षा कार्यशाला आयोजित होनी चाहिए, ताकि इसके गुर सीख कर छात्राएं सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकें। - दिव्या
- कार्यशाला में आत्मरक्षा के गुर सीखने को मिले। अब जरूरत पड़ने पर विपरीत परिस्थितियों में अपनी सुरक्षा खुद कर सकती हूं। - साक्षी
- स्लैप किक, फ्रंट किक की ट्रेनिंग लेकर मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। घर पर भी इसकी प्रैक्टिस करूंगी। दूसरों को भी सीखने को प्रेरित करूंगी। - रोशनी
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