यादों में गिरिधर मालवीय: बिना आचमन किए गंगा में नहीं रखते थे पैर, बीएचयू के गंगा वैज्ञानिक ने साझा किए अनुभव
बीएचयू के चांसलर गिरिधर मालवीय के निधन पर बीएचयू के गंगा वैज्ञानिक प्रो. बीडी त्रिपाठी और डॉ. विश्वनाथ पांडेय ने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि गिरिधर मालवीय धार्मिक तौर पर गंगा सफाई में लगे रहे। बिना आचमन किए कभी गंगा में पैर नहीं रखते थे।
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राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण पूर्व जस्टिस गिरिधर मालवीय की ही देन है। वे पहले जज थे, जिन्होंने गंगा के लिए बड़ा कदम उठाया। धार्मिक तौर पर गंगा सफाई में लगे रहे। बिना आचमन किए कभी गंगा में पैर नहीं रखते थे। सोमवार को गिरिधर मालवीय के निधन के बाद ये बातें बीएचयू के नदी वैज्ञानिक प्रो. बीडी त्रिपाठी ने अमर उजाला संवाददाता से साझा कीं।
बीएचयू के चांसलर गिरिधर मालवीय को पीएम मोदी और सीएम योगी ने अपने शोक संदेश में गंगा सफाई के लिए किए गए काम को याद किया। प्रो. बीडी त्रिपाठी ने बताया कि गंगा सफाई को लेकर गिरिधर मालवीय ने 2009 में केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि गंगा को बचाने के लिए एक समिति बने। गंगा इकोलॉजी को हर कीमत पर बचाया जाना चाहिए। पर्यावरणविद और नदी वैज्ञानिकों को एक साथ लेकर सरकार को कमेटी बनाने का आदेश दिया। सरकार ने कमेटी बनाई, जिसे बाद में प्राधिकरण बनाया गया। उस कमेटी में बीएचयू से मुझे एक्सपर्ट के तौर पर शामिल किया गया। वह गंगा महासभा के अध्यक्ष भी रहे। गंगा एक्ट का ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी के भी सदस्य रहे।
महामना की पुण्यतिथि से एक दिन पहले हुआ निधन...
महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की पुण्यतिथि से ठीक एक दिन पहले ही उनके पौत्र जस्टिस गिरिधर मालवीय ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि के अनुसार, महामना की 78वीं पुण्यतिथि मंगलवार को है और ठीक एक दिन पहले सोमवार को गिरिधर मालवीय का निधन हुआ।
छह साल से थे बीएचयू के चांसलर
बीएचयू के पूर्व विशेषाधिकारी डॉ. विश्वनाथ पांडेय का कहना है कि गिरिधर मालवीय महामना के सबसे सही प्रतिनिधि रहे। पूरे जीवन बीएचयू से जुड़े रहे। मालवीय भवन के बाद उनका घर लंका पर था। उनका जन्म मालवीय भवन में ही हुआ था। प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक की पढ़ाई उन्होंने बीएचयू से ही की। 26 नवंबर 2018 को जब वे चांसलर बने तो उनका कार्यकाल तीन साल के लिए था। बीएचयू कोर्ट की बैठक न होने से आज भी चांसलर रहे। रीयमहामना मालवीय मिशन उनके अध्यक्षीय कार्यकाल में राष्ट्रीय ऊंचाइयों पर रहा। दादा मदन मोहन मालवीय के साथ ही पिता गोविंद मालवीय भी बीएचयू के सबसे सफल कुलपतियों में से एक थे।
पीएम ने किया ट्वीट
गिरिधर मालवीय के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी के पौत्र गिरिधर मालवीय जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उनका जाना शिक्षा जगत के साथ-साथ पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। गंगा सफाई अभियान में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। न्यायिक सेवा में अपने कार्यों से भी उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। मुझे कई बार उनसे निजी तौर पर मिलने का सौभाग्य मिला। 2014 और 2019 में वाराणसी के मेरे संसदीय क्षेत्र से वे प्रस्तावक रहे थे, जो मेरे लिए अविस्मरणीय रहेगा। शोक की इस घड़ी में ईश्वर उनके परिजनों को संबल प्रदान करे। ओम शांति!
सीएम योगी का संदेश
भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय पौत्र गिरिधर मालवीय का निधन अत्यंत दुखद और शिक्षा जगत व देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ है। न्यायिक सेवा और गंगा सफाई अभियान में अविस्मरणीय योगदान के लिए सदैव याद किए जाएंगे। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान और शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ओम शांति।
मालवीय मिशन और बीएचयू कुलपति का शोक संदेश....
वे केवल कुलाधिपति नहीं, बल्कि संस्थापक महामना के बीच की एक जीवित कड़ी थे। इसी वजह से उनका लगाव विश्वविद्यालय से भावनात्मक और अप्रतिम था। अपने कर्तव्यों का सम्यक निर्वहन करते हुए उन्होंने हमेशा कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन किया। संस्थापक के पद चिह्नों पर आगे बढ़ने की उन्होंने हमेशा सलाह दी। -प्रो. सुधीर कुमार जैन, कुलपति, बीएचयू